21/06/2026
🌟 माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी का आदर्श विद्या मंदिर, माउंट आबू आगमन 🌟
आज अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम के उपरांत राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा जी ने प्रातः 9:30 बजे आदर्श विद्या मंदिर शंकर विद्या पीठ, माउंट आबू का विशेष भ्रमण किया।
इस अवसर पर उन्होंने विद्यालय की शैक्षिक, सांस्कृतिक एवं संस्कार आधारित गतिविधियों की जानकारी प्राप्त की तथा विद्यालय परिसर का अवलोकन किया। माननीय मुख्यमंत्री जी का यह आगमन विद्या भारती परिवार के लिए अत्यंत प्रेरणादायी एवं गौरवपूर्ण रहा।
विद्यालय में प्रदान की जा रही भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा, विद्यार्थियों का अनुशासन तथा राष्ट्र निर्माण की भावना से युक्त वातावरण विद्या भारती की शिक्षा पद्धति की विशिष्टता को प्रदर्शित करता है।
माननीय मुख्यमंत्री जी का सान्निध्य विद्यार्थियों, आचार्यों एवं विद्यालय परिवार के लिए प्रेरणा का स्रोत बना।
वंदे मातरम्। 🇮🇳
सादर,
विद्या भारती राजस्थान
सेवाधाम परिसर, जवाहर नगर, जयपुर, राजस्थान
#विद्या_भारती #विद्या_भारती_राजस्थान #ᴡᴏᴍᴇɴᴇᴍᴘᴏᴡᴇʀᴍᴇɴᴛ
20/06/2026
वैदिक गणित प्रशिक्षण वर्ग नोखा
वंदना एवं बौद्धिक सत्र (20/06/26)
परिचय राजूराम जी पारीक
दुर्ग सिंह जी राजपुरोहित, विनायक जी बीकानेर विभाग प्रचारक, मदन लाल जी बिश्नोई, सुनील जी झंवर (पूर्व छात्र)
मूलचन्द जी सारस्वत, राजुराम जी, भागीरथ जी, विक्रम सिंह जी उपस्थित रहे।
बौद्धिक - विनायक जी (भारतीय जीवन के मूल्य)
1. मातृशक्ति के प्रति हमारा सम्मान ओर उनके प्रति हमारा त्याग, समर्पण ही भारतीयता है।
2. विवेकानंद जी उदाहरण देते हुए बताया कि हर क्षेत्र में नारी को माता माना है।
3. भगवान के प्रति जो सम्मान है वही सम्मान सृष्टि में मौजूद सभी प्राणियों के प्रति रखना ही भारतीय जीवन मूल्य का अभूतपूर्व उदाहरण है।
4. शिक्षक को भगवान तुल्य बताया है क्योंकि वहीं हैं जो राष्ट्र निर्माण हेतु अपने पुत्र के समान सभी विद्यार्थीयो को एक रूप से शिक्षा देता हैं।
5. भगवान राम की महिमा का मंडन किया जिसमें उनके मर्यादा, सम्मान, रामराज्य की चर्चा की।
6. व्यक्ति चरित्र से पहले राष्ट्र चरित्र का निर्माण होना अनिवार्य है तभी देश, राष्ट्र, समाज का विकास होगा।
7. व्यक्ति को निरन्तर सभी के प्रति हर परिस्थिति में सेवा भाव रखना।
8. पाश्चातय संस्कृति बताती है यही सत्य है जबकि भारतीय संस्कृति बताती है यह भी सत्य है।
9. सभी मनुष्यों, जीवों, प्रकति के प्रति भारतीय संस्कृति में कृतज्ञता के भाव रखते हैं।
10. वसुधैव कुटुम्बकम् एवं सर्वे भवन्तु सुखिन के भाव रखना ही भारतीय संस्कृति है।
11. भारत के किसी भी भाग में हो रहे अन्याय के प्रति सभी का एक जुट होना ही हमारी संस्कृति को परिभाषित करता है।वंदना एवं बौद्धिक सत्र (20/06/26)
परिचय राजूराम जी पारीक
दुर्ग सिंह जी राजपुरोहित, विनायक जी बीकानेर विभाग प्रचारक, मदन लाल जी बिश्नोई, सुनील जी झंवर (पूर्व छात्र)
मूलचन्द जी सारस्वत, राजुराम जी, भागीरथ जी, विक्रम सिंह जी उपस्थित रहे।
बौद्धिक - विनायक जी (भारतीय जीवन के मूल्य)
1. मातृशक्ति के प्रति हमारा सम्मान ओर उनके प्रति हमारा त्याग, समर्पण ही भारतीयता है।
2. विवेकानंद जी उदाहरण देते हुए बताया कि हर क्षेत्र में नारी को माता माना है।
3. भगवान के प्रति जो सम्मान है वही सम्मान सृष्टि में मौजूद सभी प्राणियों के प्रति रखना ही भारतीय जीवन मूल्य का अभूतपूर्व उदाहरण है।
4. शिक्षक को भगवान तुल्य बताया है क्योंकि वहीं हैं जो राष्ट्र निर्माण हेतु अपने पुत्र के समान सभी विद्यार्थीयो को एक रूप से शिक्षा देता हैं।
5. भगवान राम की महिमा का मंडन किया जिसमें उनके मर्यादा, सम्मान, रामराज्य की चर्चा की।
6. व्यक्ति चरित्र से पहले राष्ट्र चरित्र का निर्माण होना अनिवार्य है तभी देश, राष्ट्र, समाज का विकास होगा।
7. व्यक्ति को निरन्तर सभी के प्रति हर परिस्थिति में सेवा भाव रखना।
8. पाश्चातय संस्कृति बताती है यही सत्य है जबकि भारतीय संस्कृति बताती है यह भी सत्य है।
9. सभी मनुष्यों, जीवों, प्रकति के प्रति भारतीय संस्कृति में कृतज्ञता के भाव रखते हैं।
10. वसुधैव कुटुम्बकम् एवं सर्वे भवन्तु सुखिन के भाव रखना ही भारतीय संस्कृति है।
11. भारत के किसी भी भाग में हो रहे अन्याय के प्रति सभी का एक जुट होना ही हमारी संस्कृति को परिभाषित करता है।
20/06/2026
आदर्श विद्या मंदिर देवरी में शिशु वाटिका शुभारंभ एवं भामाशाह सम्मान समारोह 26 जून को महामंडलेश्वर साध्वी डॉ. हेमानंद जी सरस्वती के सानिध्य में होगा आयोजन
देवरी - विद्या भारती द्वारा संचालित आदर्श विद्या मंदिर देवरी में आगामी 26 जून शुक्रवार को अपराह्न तीन बजे शिशु वाटिका शुभारंभ एवं भामाशाह सम्मान समारोह का आयोजन किया जाएगा। विद्यालय के प्रधानाचार्य रामनरेश योगी ने जानकारी देते हुए बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों पर आधारित शिशु शिक्षा के नवीन आयामों को समाज के समक्ष प्रस्तुत करना तथा विद्यालय के विकास में सहयोग करने वाले भामाशाहों का सम्मान करना है। कार्यक्रम में परम पूज्य साध्वी श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर डॉ. हेमानंद जी सरस्वती का पावन सानिध्य प्राप्त होगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. ललित मीणा विधायक, किशनगंज-शाहाबाद होंगे। मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. विमल कुमार जैन, सह मंत्री, विद्या भारती चित्तौड़ प्रांत उपस्थित रहेंगे। विशिष्ट अतिथि के रूप में शिक्षाविद् एवं समाजसेवी हेमंत गोयल तथा कार्यक्रम की अध्यक्षता श्रीमती मंजुलता सिकरवार, राष्ट्रीय महामंत्री, सनातन रक्षक सेना करेंगी।कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर शनिवार को विद्यालय परिसर में बैठक आयोजित की गई। बैठक में विद्या भारती बारां जिला अध्यक्ष प्रमोद कुमार राठौर स्थानीय समिति के अध्यक्ष राजकुमार मेहता एवं जिला सचिव राजेंद्र कुमार शर्मा ने व्यवस्थाओं की समीक्षा करते हुए विभिन्न समितियों का गठन किया तथा कार्यकर्ताओं को दायित्व सौंपे। इस अवसर पर जिला सचिव शर्मा ने कहा कि शिशु वाटिका, विद्या भारती की राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण आयाम है, जो बालकों के सर्वांगीण एवं संस्कारयुक्त विकास का आधार बनेगी।विद्यालय समिति के संरक्षक हरिशंकर शर्मा सचिव अनिल कुमार सहित समिति सदस्यों एवं आचार्यों ने कार्यक्रम को भव्य एवं सफल बनाने का संकल्प लिया। शांति मंत्र के साथ बैठक का समापन हुआ।
17/06/2026
“कार्य, कार्यकर्ता एवं कार्यपद्धति” विषय पर नवीन आचार्य अभ्यास वर्ग-2026 का समापन
बांदीकुई। विद्या भारती संस्थान जयपुर द्वारा आयोजित नवीन आचार्य अभ्यास वर्ग-2026 का समापन सत्र माँ सरस्वती एवं भारत माता के समक्ष दीप प्रज्वलन एवं वंदना के साथ सम्पन्न हुआ।
समापन सत्र में मुख्य वक्ता के रूप में श्री शिव प्रसाद ( अखिल भारतीय मंत्री विद्या भारती) उपस्थित रहे। उनके साथ श्री बृजमोहन वर्मा, श्री राजेंद्र कुमार सोनी एवं श्री सत्यनारायण मिश्रा मंचासीन रहे।
वर्ग वृत्त प्रस्तुत करते हुए श्री कमलेश गौतम ने बताया कि करौली, धौलपुर, भरतपुर, अलवर एवं दौसा जिलों के कुल 106 आचार्य-आचार्याओं ने वर्ग में सहभागिता की।
अपने संबोधन में श्री राजेंद्र कुमार सोनी ने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण वर्ग संगठनात्मक समरसता, सहयोग एवं अनुभवों के आदान-प्रदान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
मुख्य वक्ता श्री शिव प्रसाद ने “कार्य, कार्यकर्ता एवं कार्यपद्धति” विषय पर विचार रखते हुए कहा कि विद्या भारती का उद्देश्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि राष्ट्रनिष्ठ, संस्कारित एवं चरित्रवान नागरिकों का निर्माण करना है। उन्होंने कहा कि संगठन की सफलता कार्य, कार्यकर्ता और कार्यपद्धति के समन्वय पर आधारित होती है। निस्वार्थ भाव, समर्पण, अनुशासन, विनम्रता एवं सकारात्मक दृष्टिकोण एक आदर्श कार्यकर्ता के प्रमुख गुण हैं।
उन्होंने बताया कि वंदना, प्रार्थना, संस्कारमूलक कार्यक्रम, मातृ सम्मेलन, अभिभावक सम्मेलन एवं विभिन्न उत्सव समाज में संगठन के उद्देश्यों को पहुँचाने के प्रभावी माध्यम हैं।
अंत में वर्ग पालक श्री सत्यनारायण मिश्रा ने सभी प्रशिक्षकों, वर्ग टोली, विद्यालय परिवार एवं प्रबंधन समिति का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में भावगीत की प्रस्तुति श्री घनश्याम योगी ने दी तथा प्रबंध कार्यकर्ताओं व प्रशिक्षणार्थियों के साथ गणमान्य नागरिक एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
वंदे मातरम्। 🇮🇳
सादर,
विद्या भारती राजस्थान
सेवाधाम परिसर, जवाहर नगर, जयपुर, राजस्थान
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16/06/2026
🇮🇳 वन्दे मातरम् के 150वें गौरवशाली वर्ष एवं संत गुरु रविदास जी की 650वीं जयंती को समर्पित संस्कार राजस्थान (अप्रैल, मई, जून-2026) पत्रिका का नवीन अंक।
भारतीय संस्कृति, राष्ट्रभक्ति एवं सामाजिक समरसता के प्रेरक विचारों से परिपूर्ण।
वंदे मातरम्।
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विद्या भारती राजस्थान
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16/06/2026
समाज में परिवर्तन का कार्य विद्यालय करते है, शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नही, बल्कि राष्ट्र एवं चरित्र निर्माण का प्रमुख आधार है........गोविन्द कुमार जी
भीलवाड़ा 16 जून/विद्या भारती शिक्षा संस्थान के तत्वावधान में भीलवाड़ा-चित्तौड़गढ़-प्रतापगढ़ का नवीन आचार्य अभ्यास वर्ग का समापन समारोह मंगलवार को आदर्श विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय शास्त्रीनगर भीलवाड़ा में संपन्न हुआ।
वर्ग प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए भीलवाड़ा विद्या भारती शिक्षा संस्थान के सचिव देवराजसिंह राणावत ने बताया कि प्रशिक्षण के माध्यम से 132 नवीन आचार्यों को विद्यालयीन कार्यों के साथ-साथ विद्या भारती की कार्यपद्धति, उद्देश्य एवं संस्कार आधारित शिक्षा व्यवस्था की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।
समापन समारोह के मुख्य वक्ता विद्या भारती राजस्थान क्षेत्र के संगठन मंत्री गोविन्द कुमार ने अपने उद्बोधन में कहा कि, शिक्षक केवल ज्ञान देने वाला नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के चरित्र निर्माण का प्रमुख आधार होता है। उन्होंने आचार्यों से आह्वान किया कि वे विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन, सेवा और संस्कारों का विकास करने के लिए समर्पित भाव से कार्य करें। उन्होने कहा कि ऐसे प्रशिक्षण वर्गों का उद्देश्य शिक्षकों को भारतीय जीवन मूल्यों, संस्कारयुक्त शिक्षा एवं प्रभावी अध्यापन पद्धति से जोड़ना होता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता भीलवाड़ा विद्या भारती शिक्षा संस्थान के अध्यक्ष हीरा लाल टेलर ने की। मुख्य अतिथि पूर्व छात्र जयदेव पारीक एवं विशिष्ट अतिथि विद्या भारती शिक्षा संस्थान प्रतापगढ़ के प्रभारी जितेन्द्र कुमार जोशी थे।
दस दिवसीय वर्ग में नवीन आचार्यों ने प्रशिक्षण के दौरान शिक्षण कौशल, संगठनात्मक कार्यपद्धति एवं संस्कारमूलक शिक्षा के विभिन्न आयामों का अभ्यास किया।
प्रशिक्षण वर्ग के दौरान सुलेख, श्रुतिलेख, वंदना अभ्यास, विषय शिक्षण, अभिभावक संपर्क, विद्यालयी गतिविधियों के संचालन तथा प्रभावी शिक्षण पद्धतियों पर विभिन्न सत्र आयोजित किए गए।
समापन कार्यक्रम में विद्या भारती चित्तौड़ प्रान्त के सदस्य अशोक कुमार व्यास, चित्तौड़गढ़ विद्या भारती शिक्षा संस्थान के सचिव कैलाशचन्द्र शर्मा, सह संयोजक प्रज्ञा प्रवाह राजस्थान क्षेत्र सत्यनाराण कुमावत, स्थानीय विद्यालय के प्रधानाचार्य अविनाश कुमार छीपा, प्रशिक्षणार्थी आचार्य दीदी उपस्थित थे।
कार्यक्रम का संचालन सांवरलाल प्रजापत ने किया।
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16/06/2026
वर्तमान राष्ट्रीय चुनौतियों के प्रति सजग रहना प्रत्येक नागरिक का दायित्व – शिवप्रसाद जी
झुंझुनूं। वर्तमान समय में भारत अनेक राष्ट्रीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन चुनौतियों के प्रति समाज को जागरूक करने एवं नागरिकों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए आयोजित बौद्धिक सत्र में शिवप्रसाद जी ने कहा कि भारत निरंतर प्रगति के पथ पर आगे बढ़ रहा है और विश्व स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। भारत की बढ़ती सामर्थ्य एवं विकास को कुछ पड़ोसी देश सहज रूप से स्वीकार नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण सीमाओं पर सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि देश के सामने बाहरी चुनौतियों के साथ-साथ आंतरिक स्तर पर भी अनेक विषय चिंतन के हैं। चरित्र संकट, तुष्टीकरण की प्रवृत्ति, आतंकवाद एवं आर्थिक क्षेत्र की चुनौतियां वर्तमान समय के प्रमुख विषय हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र निर्माण के लिए अच्छे संस्कार, नैतिक मूल्य, कर्तव्य भावना एवं सामाजिक समरसता का होना आवश्यक है।
शिवप्रसाद जी ने कहा कि आतंकवाद जैसी समस्याओं का समाधान समाज की जागरूकता, एकता एवं राष्ट्रभावना से ही संभव है। आर्थिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, स्वदेशी भावना, उत्पादन वृद्धि एवं सकारात्मक सोच के माध्यम से देश को और अधिक सशक्त बनाया जा सकता है। उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक नागरिक अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे।
इस अवसर पर राजेंद्र कुमार जी गोयन (जिला व्यवस्थापक), राजेश शर्मा (जिला सचिव झुंझुनूं), त्रिविक्रम अपूर्वा (जिला सचिव चूरू), मनीष बेदी (सह सचिव चूरू), निर्मल डूडी (प्रधानाचार्य), रमेश कुमार, सुरेश कुमार, घनश्याम जी सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
वंदे मातरम्। 🇮🇳
सादर,
विद्या भारती राजस्थान
सेवाधाम परिसर, जवाहर नगर, जयपुर, राजस्थान
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15/06/2026
दिनांक १७ मई २०२६ को विद्या भारती जोधपुर प्रांत के जोधपुर महानगर संचालित आदर्श विद्या मन्दिर माध्यमिक, रामचौक का पूर्व छात्रों (भैया - बहिन) का अतिथियों द्वारा मां सरस्वती, ॐ एवं भारत माता के चित्रों समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।
सम्मलेन में पूर्व छात्रों का स्वागत तिलक लगाकर, मुंह मीठा कराकर, अंग वस्त्र एवं परिचय पत्र पहना कर स्वागत किया गया।
सम्मलेन के मुख्य वक्ता विद्या भारती जोधपुर प्रांत के संगठन मंत्री आदरणीय रवि कुमार जी का पाथेय प्राप्त हुआ।
मंच पर तीन कुलगुरु जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय जोधपुर के प्रो पवन कुमार जी शर्मा, राज ऋषि भर्तृहरि मत्स्य विश्वविद्यालय अलवर के कुलगुरु प्रो रमन कुमार जी दवे (पूर्व छात्र), मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय उदयपुर के कुलगुरु प्रो कैलाश जी डागा (पूर्व छात्र), जनप्रतिनिधि जोधपुर शहर के विधायक आदरणीय अतुल जी भंसाली (पूर्व छात्र), साहित्य विद आदरणीय अयोध्या प्रसाद जी गौड़, प्रबंध समिति आदर्श विद्या मंदिर जोधपुर महानगर के अध्यक्ष माननीय हरीश जी लोहिया, नागौरी गेट की थानाधिकारी शैफाली सांखला एवं सम्मलेन की अध्यक्ष श्रीमती रेखा जी नाहर।
विद्या मंदिर के 55 वर्षों के भैया बहिनों का स्नेह मिलन एवं प्रीतिभोज हुआ। कार्यक्रम संयोजक श्री हेमेन्द्र जी गौड़
सादर,
पूर्व छात्र परिषद - विद्या भारती राजस्थान
सेवाधाम परिसर, जवाहर नगर,जयपुर – 302004
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14/06/2026
गुरुवंदन दिल से, बचपन फिर से : 25 वर्ष बाद रजत जयंती समारोह में जुटे सत्र 2001 के विद्यार्थी
डीडवाना, 14 जून। स्थानीय पंडित बच्छराज व्यास आदर्श विद्या मंदिर के सत्र 2001 के पूर्व विद्यार्थियों ने विद्यालयीन जीवन की सुनहरी यादों को ताज़ा करते हुए 25 वर्ष बाद आयोजित रजत जयंती समारोह “गुरुवंदन दिल से, बचपन फिर से” में उत्साहपूर्वक भाग लिया। दो दिवसीय इस विशेष आयोजन का आयोजन 13 एवं 14 जून को किया गया, जिसमें देश के विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत पूर्व विद्यार्थी अपने परिवारों सहित सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय परिसर में गुरुजनों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से किया गया। इसके पश्चात विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर अपने छात्र जीवन की मधुर स्मृतियों को पुनर्जीवित किया। पूरे वातावरण में आत्मीयता, श्रद्धा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला।
समारोह का मुख्य आकर्षण गुरुजनों का सम्मान रहा। सत्र 2001 के तत्कालीन प्रधानाचार्य से लेकर विद्यालय के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों एवं भैयाजी तक सभी गुरुजनों का माला, शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर अभिनंदन किया गया। इस अवसर पर गुरुजनों ने विद्यार्थियों को जीवन में संस्कार, अनुशासन और समाज सेवा के मूल्यों को सदैव आत्मसात करने का संदेश दिया।
कार्यक्रम के दौरान गुरुजनों एवं पूर्व विद्यार्थियों ने अपने संस्मरण साझा किए। वक्ताओं ने विद्यालय में बिताए गए दिनों, शिक्षकों के मार्गदर्शन और छात्र जीवन की अनेक रोचक घटनाओं को याद करते हुए भावनात्मक अनुभव साझा किए। कई अवसरों पर पुरानी यादों ने उपस्थित विद्यार्थियों को भावुक भी कर दिया।
समारोह में सत्र 2001 के दिवंगत साथी अभिषेक बागड़िया को विशेष रूप से श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनके परिजनों को कार्यक्रम में आमंत्रित कर सभी पूर्व विद्यार्थियों एवं गुरुजनों ने श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा उनके जीवन और व्यक्तित्व को स्मरण किया।
विद्यालयीन परंपराओं को पुनर्जीवित करते हुए दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, भोजन मंत्र एवं शांति पाठ का सामूहिक आयोजन किया गया। इन गतिविधियों ने उपस्थित सभी पूर्व विद्यार्थियों को अपने बचपन और विद्यालयीन संस्कारों की याद दिला दी।
प्रथम दिवस के कार्यक्रम के पश्चात सभी प्रतिभागी धार्मिक एवं सांस्कृतिक यात्रा के लिए पुष्कर रवाना हुए। यात्रा के दौरान परिचय सत्र, अंताक्षरी, देशभक्ति गीत गायन तथा विभिन्न मनोरंजक गतिविधियों का आयोजन किया गया। सभी साथियों ने अपने-अपने जीवन, व्यवसाय और सामाजिक कार्यों का परिचय देते हुए पिछले 25 वर्षों की उपलब्धियों एवं अनुभवों को साझा किया।
कार्यक्रम समिति के अनुसार रजत जयंती समारोह का उद्देश्य केवल पुनर्मिलन नहीं, बल्कि गुरुजनों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना तथा विद्यालय द्वारा दिए गए संस्कारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लेना था। दो दिवसीय आयोजन ने सभी प्रतिभागियों को भावनात्मक रूप से जोड़ते हुए छात्र जीवन की यादों को पुनः जीवंत कर दिया।
समारोह के अंत में सभी पूर्व विद्यार्थियों ने भविष्य में भी नियमित रूप से ऐसे आयोजनों के माध्यम से आपसी संबंधों एवं गुरु-शिष्य परंपरा को सुदृढ़ बनाए रखने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम समिति में विशाल सिखवाल, नितिन सेठिया, धनेश अग्रवाल,विजय भारुका, प्रमोद मोठ, मनमोहन सोनी,कैलाश सोनी आदि ने सहयोग किया।
सादर,
पूर्व छात्र परिषद - विद्या भारती राजस्थान
सेवाधाम परिसर, जवाहर नगर,जयपुर – 302004
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