Nedhi chauhan
karuna chauhan �
�. 17/ 06 /2000
i �my family
07/01/2026
Goodnight everyone
07/01/2026
07/01/2026
एक अविवाहित शिक्षिका ने अपने दो अनाथ विद्यार्थियों को तब गोद लिया, जब वे सात साल के थे — 22 साल बाद, एक दिल को छू लेने वाला अंत!
वह राजस्थान के एक छोटे से गाँव की प्राथमिक विद्यालय की शिक्षिका थीं — धूप से भरा, हवा से महकता एक प्यारा-सा गाँव। वह तीस साल की थीं, अविवाहित, निःसंतान, और स्कूल के पीछे बने एक छोटे से घर में अकेली रहती थीं।
उसी साल एक दर्दनाक सड़क हादसे में जुड़वाँ भाइयों के माता-पिता की मौत हो गई — दोनों ही सिर्फ़ सात साल के थे और उनकी कक्षा 2-बी के छात्र थे। पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने संवेदना और मदद की पेशकश की, और प्रशासन ने लड़कों को सरकारी अनाथालय भेजने की योजना बनाई। लेकिन उस रात वह सो नहीं सकीं — बस सोचती रहीं।
अगली सुबह उन्होंने दोनों बच्चों को गोद लेने के लिए आवेदन दे दिया।
लोग हैरान रह गए:
“आपकी न तो शादी हुई है, न ही आपके बच्चे हैं — आप दो छोटे लड़कों की देखभाल कैसे करेंगी?”
वह बस मुस्कुराईं और बोलीं,
“मैं पढ़ना-लिखना सिखाती हूँ; मैं इंसानियत सिखाती हूँ। अब उसे सच में जीने का समय है।”
पहले कुछ साल तीनों के लिए बहुत कठिन थे। दिन में वह पढ़ातीं और बाकी समय लड़कों की हर ज़रूरत खुद संभालतीं — उनका खाना, कपड़े, पढ़ाई और दवाइयाँ। वह दोस्तों से पुराने कपड़े माँग लेतीं और पुरानी साइकिलें ठीक करवा देतीं, ताकि बच्चे स्कूल जा सकें।
बड़ा भाई तेज़ और समझदार था, जबकि छोटा भाई शांत स्वभाव का था और अक्सर बीमार पड़ जाता था। लेकिन दोनों ही पढ़ाई में बहुत अच्छे थे — विनम्र, दयालु और आज्ञाकारी। अपनी “दूसरी” माँ की ममता में पलते-बढ़ते हुए, उन्होंने स्वाभाविक रूप से उन्हें प्यार और कृतज्ञता से “माँ” कहना शुरू कर दिया।
वक़्त पंख लगाकर उड़ गया।
बाईस साल बाद…
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