18/02/2026
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।।
Shayari for all Shayari lovers....!
18/02/2026
कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्।
सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि।।
✨❤️✨
वो लड़का…
जो हर बात पर “ठीक हूँ” कहता है…
असल में कुछ भी ठीक नहीं होता उसके भीतर…
उसने हँसना सीखा है…
ताकि कोई उसकी आँखों के सवाल पढ़ न सके…
उसकी मुस्कान…
अक्सर उस बोझ की चादर होती है…
जो वो रोज़ खुद पर ओढ़ लेता है…
उसकी जेबों में…
सिक्कों से ज़्यादा अधूरे सपने होते हैं…
और वॉलेट में…
किसी पुराने बिल जैसा…
बहुत हल्के प्रिंट में बच गया एक नाम…
वो लड़का…
जो हर किसी की बातें ध्यान से सुनता है…
बस इसलिए कि…
कोई उसकी भी चुप्पियों को कभी सुने…
वो कभी-कभी खुद से बात करता है…
आईने में नहीं…
अपने फोन के नोट्स में…
जैसे खुद को ही कोई मेसेज भेज रहा हो…
“तू है न अभी भी…”
एक बार किसी ने उससे पूछा…
तेरी आंखों में इतना थकान क्यों है...
उसने हँसकर कहा…
नींद पूरी है… बस ख़्वाब नहीं आते अब
✨❤️✨
06/04/2025
कुछ प्रेम कहानियां,
खिड़कियों तक ही
सीमित रह जाती हैं..
उन्हें..
उनके हिस्से के
दरवाज़े नहीं मिलते....!!
जिसमें प्रेम
बेहिचक
दाख़िल हो पाए
प्रेमी के जीवन में..!!
चोरी-छिपे
प्रेम
उन दरवाजों से
आना भी चाहे तो..
समाज नाम का पहरेदार
उनका रास्ता रोक देता है…
सदैव के लिए…!!!❣️❤️❣️
....✍️
25/02/2025
A record that’s off the record, yet one of a kind!
23/02/2025
🥲
22/02/2025
27/02/2023
“अरे बुढ़िया तू यहाँ न आया कर, तेरा बेटा तो चोर-डाकू था, इसलिए गोरों ने उसे मार दिया“
जंगल में लकड़ी बीन रही एक मैली सी धोती में लिपटी बुजुर्ग महिला से वहाँ खड़े व्यक्ति ने हंसते हुए कहा,
“नही चंदू ने आजादी के लिए कुर्बानी दी हैं“ बुजुर्ग औरत ने गर्व से कहा।
उस बुजुर्ग औरत का नाम था जगरानी देवी और इन्होने पांच बेटों को जन्म दिया था, जिसमें आखिरी बेटा कुछ दिन पहले ही आजादी के लिए बलिदान हुआ था। उस बेटे को ये माँ प्यार से चंदू कहती थी और दुनिया उसे आजाद ... जी हाँ! चंद्रशेखर आजाद के नाम से जानती है।
हिंदुस्तान आजाद हो चुका था, आजाद के मित्र सदाशिव राव एक दिन आजाद के माँ-पिता जी की खोज करते हुए उनके गाँव पहुंचे। आजादी तो मिल गयी थी लेकिन बहुत कुछ खत्म हो चुका था। चंद्रशेखर आज़ाद के बलिदान के कुछ वर्षों बाद उनके पिता जी की भी मृत्यु हो गयी थी। आज़ाद के भाई की मृत्यु भी इससे पहले ही हो चुकी थी।
अत्यंत निर्धनावस्था में हुई उनके पिता की मृत्यु के पश्चात आज़ाद की निर्धन निराश्रित वृद्ध माता उस वृद्धावस्था में भी किसी के आगे हाथ फ़ैलाने के बजाय जंगलों में जाकर लकड़ी और गोबर बीनकर लाती थी तथा कंडे और लकड़ी बेचकर अपना पेट पालती रहीं। लेकिन वृद्ध होने के कारण इतना काम नहीं कर पाती थीं कि भरपेट भोजन का प्रबंध कर सकें। कभी ज्वार कभी बाज़रा खरीद कर उसका घोल बनाकर पीती थीं क्योंकि दाल चावल गेंहू और उसे पकाने का ईंधन खरीदने लायक धन कमाने की शारीरिक सामर्थ्य उनमे शेष ही नहीं थी।
शर्मनाक बात तो यह कि उनकी यह स्थिति देश को आज़ादी मिलने के 2 वर्ष बाद (1949 ) तक जारी रही।
चंद्रशेखर आज़ाद जी को दिए गए अपने एक वचन का वास्ता देकर सदाशिव जी उन्हें अपने साथ अपने घर झाँसी लेकर आये थे, क्योंकि उनकी स्वयं की स्थिति अत्यंत जर्जर होने के कारण उनका घर बहुत छोटा था। अतः उन्होंने आज़ाद के ही एक अन्य मित्र भगवान दासमाहौर के घर पर आज़ाद की माता श्री के रहने का प्रबंध किया और उनके अंतिम क्षणों तक उनकी सेवा की।
मार्च 1951 में जब आजाद की माँ जगरानी देवी का झांसी में निधन हुआ तब सदाशिव जी ने उनका सम्मान अपनी माँ के समान करते हुए उनका अंतिम संस्कार स्वयं अपने हाँथों से ही किया था।
“देश के लिए बलिदान देने वाले क्रांतिकारियों के परिवारों की ऐसी ही गाथा है।”
“चंद्रशेखर आज़ाद जी के बलिदान दिवस पर अश्रुपूर्ण श्रद्धांजली” 🙏🚩
15/01/2023
पत्थर की भी तक़दीर बदल सकती है,
शर्त यह है कि सलीक़े से सँवारा जाए 🖤🥀
29/11/2022
ज़िन्दगी में एक लक्ष्य ऐसा भी होना जरूरी है कि आपकी वजह से औरो के चेहरे पर मुस्कुराहट आये, भले ही उसके एवज में आपको जोकर ही क्यों न बनना पड़े 🥳
31/10/2022
🖤🥀