Darshan Educatainment

Darshan Educatainment

Share

Darshan Educatainment is a social media platform created with a mission to spread the light of education @ entertainment mode...

15/02/2026

Mahashivratri

14/02/2026

भगवान शिव को भोलेनाथ क्यों कहते है?

14/02/2026

जानिए महाशिवरात्रि मनाने का असली कारण। Maha Shivaratri

18/04/2025

पृथ्वी का नाजुक कवच

हमारी पृथ्वी को सूरज की घातक किरणों,उल्काओं और अंतरिक्ष के शून्य तापमान से बचाने वाला जो सुरक्षा कवच है वो है वायुमंडल,इसे पृथ्वी का नाजुक कवच कहा जाता है। ये केवल कुछ सौ किलोमीटर मोटा है और इतने नाजुक संतुलन पर टिका है कि ज़रा सी गड़बड़ इसका संतुलन बिगाड़ सकती है।

1. वायुमंडल क्या है?
वायुमंडल धरती के चारों ओर फैली गैसों की एक पतली परत है। ये हमें दिखाई नहीं देती,लेकिन इसका हर हिस्सा जीवन के लिए जरूरी है। यह लगभग 480 किलोमीटर ऊँचाई तक फैला है,पर इसकी सबसे महत्वपूर्ण परतें धरती के बहुत पास होती हैं।

2. वायुमंडल की परतें
ट्रोपोस्फियर: 0–12 km मौसम,बादल,बारिश यहीं सब होता है।
स्ट्रैटोस्फियर: 12–50 km ओज़ोन परत यहीं है,UV किरणों से बचाव करती है।
मेसोस्फियर: 50–85 km उल्काएं यहीं जलकर नष्ट होती हैं।
थर्मोस्फियर: 85–600 km ऑरोरा (Northern Lights) यहीं होते हैं।
एक्सोस्फियर: 600+ km धीरे-धीरे अंतरिक्ष में विलीन होती परत।

3. क्यों कहते हैं इसे ‘नाज़ुक’?
1. अत्यंत पतला है
अगर पृथ्वी को एक सेब मानें, तो उसका वायुमंडल सिर्फ छिलका जितना मोटा होगा। यही कवच है जो हमें घातक अंतरिक्षीय खतरे से बचाता है।

2. असंतुलन से बिगड़ जाता है:
* CO2 और अन्य ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ना जलवायु परिवर्तन का कारण बनता है।
* ओज़ोन परत में छेद UV किरणों को ज़्यादा आने देता है,जिससे कैंसर,फसलें और समुद्री जीवन प्रभावित होते हैं।
* वायु प्रदूषण हमारे श्वसन तंत्र को नुकसान पहुंचाता है और हवा की गुणवत्ता गिराता है।

4. वायुमंडल हमारे लिए क्या करता है?
* सांस लेने के लिए ऑक्सीजन देता है।
* हमें तापमान extremes से बचाता है। अगर वायुमंडल न हो तो दिन में 100°C से ज़्यादा और रात में -150°C से नीचे तापमान हो सकता है।
* उल्काओं को जलाकर गिरने से पहले ही नष्ट कर देता है।
* सभी मौसम गतिविधियों को संचालित करता है।
* संचार (रेडियो वेव्स),नेविगेशन,GPS आदि के लिए सहायक है।

5. क्या हो अगर ये कवच न रहे?
* जीवन असंभव हो जाएगा।
* सूरज की घातक किरणें सीधे त्वचा को जलाएंगी।
* हवा में ऑक्सीजन नहीं होगी, लोग कुछ मिनटों में दम तोड़ देंगे।
* धरती पर तापमान जीने योग्य नहीं रहेगा।
* उल्काएँ धरती पर सीधी टकराएंगी।

6. क्या कर सकते हैं हम?
* प्रदूषण को कम करें।
* पेड़ लगाएँ ये CO2 खींचते हैं और ऑक्सीजन बढ़ाते हैं।
* कार्बन फुटप्रिंट घटाएँ।
* ओज़ोन परत को बचाने वाले उत्पाद इस्तेमाल करें।
* क्लीन एनर्जी (सौर, पवन आदि) अपनाएँ।

निष्कर्ष
वायुमंडल कोई अदृश्य चीज़ नहीं,बल्कि एक जीवित सुरक्षा कवच है,जिसे हमने अनजाने में बहुत नुकसान पहुँचाया है। अगर अब भी नहीं संभले,तो ये कवच धीरे-धीरे टूटता जाएगा और उसके साथ हमारा जीवन भी।

03/11/2024

गोत्र क्या है? तथा भारतीय सनातन आर्य परम्परा में इसका क्या सम्बंध है..?? अंत तक जरुर पढ़े

भारतीय परम्परा के अनुसार विश्वामित्र, जमदग्रि, वसिष्ठ और कश्यप की सन्तान गोत्र कही गई है-

"गौतम, भरद्वाज, अत्रि,विश्वामित्रो जमदग्निर्भरद्वाजोऽथ गोतमः । अत्रिर्वसिष्ठः कश्यप इत्येते गोत्रकारकाः"
इस दृष्टि से कहा जा सकता है कि किसी परिवार का जो आदि प्रवर्तक था, जिस महापुरुष से परिवार चला उसका नाम परिवार का गोत्र बन गया और उस परिवार के जो स्त्री-पुरुष थे वे आपस में भाई-बहिन माने गये, क्योंकि भाई बहिन की शादी अनुचित प्रतीत होती है, इसलिए एक गोत्र के लड़के-लड़कियों का परस्पर विवाह वर्जित माना गया। ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य शूद्र आदि वर्ण कुलस्थ के लोगों के लिए गोत्र व्योरा रखना इसी लिए भी आवश्यक है क्योंकि गोत्र ज्ञान होने से उसके अध्ययन की परम्परा में उसकी शाखा-प्रशाखा का ज्ञान होने से तत सम्बन्धी वेद का पठन―पाठन पहले करवाया जाता है
पश्चात अन्य शाखाओं का! किन्तु आज हिंदुओं में गोत्र को स्मरण रखने की परंपरा का त्याग करने से गोत्र संकरता बढ़ रही है। और सगोत्र विवाह आदि होना आरम्भ हो गया है। इसी लिए आज सुबह मैंने यह प्रश्न रखा था कि घरवापसी वालो का या अज्ञात गोत्र धारियों का गोत्र निश्चय कैसे होगा? गोत्र के सम्बन्ध में याज्ञवल्क्य और बौधायन दोनों का मत है कि कालान्तर में गोत्रों की संख्या सात न रहकर हज़ारों में हो गई।तब एक वंश-परम्परा में खानदान का जो मुख्य व्यक्ति हुआ,चाहे वह आदि काल में हुआ,या बीच के काल में हुआ,उसके नाम से गोत्र चल पड़ा!यहाँ तक में तो कोई दिक्कते नही है।
परम्परा प्रसिद्धं गोत्रम्-याज्ञवल्क्य गोत्र सम्बन्धी परम्परा का निष्कर्ष यह है कि जिन लोगों का आदिपुरुष एक माना गया वे आपस में भाई-बहिन माने जाने से उनके बीच विवाह निषिद्ध माना गया। जहाँ तक व्यवहार का सम्बन्ध है,हिन्दूसमाज में सपिण्ड विवाह पहले भी होते रहे हैं और आज भी हो रहे हैं।
उदाहरणार्थ - अर्जुन ने अपने मामा की लड़की सुभद्रा से विवाह किया जिससे उसका पुत्र अभिमन्यु पैदा हुआ। कुन्ती और सुभद्रा के पिता सगे भाई-बहन थे, दोनों शूरसेन की सन्तान थे। कुन्ती का वास्तविक नाम पृथा था, राजा कुन्तीभोज ने पिता शूरसेन से गोद लेने के कारण कुन्ती पड़ा। इसलिए तो अर्जुन को पार्थ कहा जाता है।
वासुदेव की दो पत्नियाँ थीं . रोहिणी और देवकी। रोहिणी की सन्तान बलराम और सुभद्रा थे जबकि देवकी की सन्तान कृष्ण थे। अभिमन्यु ने अपनी माता सुभद्रा के सगे भाई अर्थात अपने सगे मामा बलराम की पुत्री वत्सला से विवाह किया।
सुभद्रा और बलराम एक ही माँ रोहिणी और वासुदेव की सन्तान थे। श्रीकृष्ण के लड़के प्रद्युम्न का विवाह भी अपने मामा की लड़की रुक्मावती के साथ हुआ था। श्रीकृष्ण के पोते अनिरुद्ध ने अपने मामा की लड़की रोचना से विवाह किया। परीक्षित ने अपने सगे मामा राजा उत्तर(विराट नरेश के पुत्र) की लड़की इरावती से विवाह किया था। सहदेव ने अपने मामा द्युतिमान(शल्य के भाई) की बेटी विजया से विवाह किया। सिद्धार्थ (गौतम बुद्ध) का विवाह अपने सगे मामा की लड़की यशोधरा से हुआ था।
अजातशत्रु ने अपने सगे मामा की बेटी वज्जिरा से विवाह किया।
महाभारत के समय से ही मामा की लड़की से विवाह को अति उत्तम, शुभ और कुलीन माना जाता था, गलत नहीं। मामा की बेटी को बहन की मान्यता नहीं दी गई है प्राचीन समय से ही।
नोद्वहेत्कपिलां कन्यां नाधिकाङ्क्षीं न रोगिणीम्।
नालोमिकां नातिलोमांन वाचाटां न पिङ्गलाम् ॥ ६ ॥
दक्षिण भारत में मामा की लड़की से विवाह होना आम बात है। मेरे गुरुकुल के एक दक्षिण पंथी ब्राह्मण मित्र ने भी इसकी पुष्टि मेरे समक्ष की थी। महाराष्ट्र, गुजरात, उड़ीसा, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और पूरे दक्षिणी भारत मे सगे मामा की बेटी से शादी का बहुत प्रचलन है। यहाँ प्रश्न उठता है कि जैसे पिता का गोत्र छोड़ा जाता है वैसे ही माता का गोत्र छोड़ना जरूरी नही। वीर्य की प्रधानता होने से पिता के गोत्र को पूरी तरह छोड़ना महर्षि मनुजी ने आवश्यक समझा। लेकिन मातृ पक्ष की लड़की ली जा सकती है अर्थात मामा की लड़की से शादी धर्मानुसार मान्य है। लेकिन अपने गोत्र में शादी पूर्णतः वर्जित/निषेध है...

10/09/2024

#एक पति ने अपने गुस्सैल पत्नी से तंग आकर उसे कीलों से भरा एक थैला देते हुए कहा ,"तुम्हें जितनी बार क्रोध आए तुम थैले से एक कील निकाल कर बाड़े में ठोंक देना !"

पत्नी को अगले दिन जैसे ही क्रोध आया उसने एक कील बाड़े की दीवार पर ठोंक दी। यह प्रक्रिया वह लगातार करती रही।

धीरे धीरे उसकी समझ में आने लगा कि कील ठोंकने की व्यर्थ मेहनत करने से अच्छा तो अपने क्रोध पर नियंत्रण करना है और क्रमशः कील ठोंकने की उसकी संख्या कम होती गई।

एक दिन ऐसा भी आया कि पत्नी ने दिन में एक भी कील नहीं ठोंकी।

उसने खुशी खुशी यह बात अपने पति को बताई। वे बहुत प्रसन्न हुए और कहा, "जिस दिन तुम्हें लगे कि तुम एक बार भी क्रोधित नहीं हुई, ठोंकी हुई कीलों में से एक कील निकाल लेना।"

पत्नी ऐसा ही करने लगी। एक दिन ऐसा भी आया कि बाड़े में एक भी कील नहीं बची। उसने खुशी खुशी यह बात अपने पति को बताई।

पति उस पत्नी को बाड़े में लेकर गए और कीलों के छेद दिखाते हुए पूछा, "क्या तुम ये छेद भर सकती हो?"

पत्नी ने कहा, "नहीं जी"

पति ने उसके कन्धे पर हाथ रखते हुए कहा,"अब समझी, क्रोध में तुम्हारे द्वारा कहे गए कठोर शब्द, दूसरे के दिल में ऐसे छेद कर देते हैं, जिनकी भरपाई भविष्य में तुम कभी नहीं कर सकते !"

सन्देश : जब भी आपको क्रोध आये तो सोचिएगा कि कहीं आप भी किसी के दिल में कील ठोंकने तो नहीं जा रहे 😀😀

आजकल लोग ऐसी बात बोल देते हैं दूसरों को बुरा लग जाता है अगला को पता नही चलता, इसलिए कुछ भी बोलने से पहले से सोचा करें
पता नही लोग क्या क्या बोले चले जाते हैं फिर बाद में पता चलता है उसको बुरा लगा है, तब सोचते हैं मैंने ये क्या बोल दिया है
गुस्सा कम करो, अगर गुस्सा आ भी जाये तो कोई ऐसा काम ना करें बाद में दिक्कत हो या शर्मिंदा होना पड़े

दोस्तों,,, पोस्ट अच्छी लगी हो तो फॉलो, लाइक, कॉमेंट, शेयर ज़रूर करें 🙏🙏

#हिंदीसाहित्य ✍️✍️

Photos from आचार्य सुदर्शन सेन्ट्रल स्कूल - रीगा, सीतामढ़ी's post 18/08/2024
30/04/2024

आपका क्या अनुमान है?

27/04/2024

आखिर भगवान श्रीराम ने ही रावण को क्यों मारा था? जबकि बाली ने रावण को 6 महीने तक अपने कांख में दबाए रखा था। और रावण इतना पराक्रमी होने के बाद भी उसमें इतना सामर्थ्य नहीं था कि वह बाली के चंगुल से छूट सके।

दूसरे नंबर पर आते हैं जामवंत जी, जामवंत जी के शक्ति का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लिया था तब जामवंत जी ने वामन अवतार समेत कुछ ही क्षणों में तीनो लोको का परिक्रमा 18 बार कर लिया था।

और इसके बाद तीसरे नंबर पर आते हैं हनुमान जी, अगर हनुमानजी चाहते तो उनके एक ही मुक्के से रावण का अंत हो सकता था। क्योंकि लंका जलाने से पहले हनुमान जी ने रावण से कहा था कि मैं स्वयं तुम्हें मृत्यु दंड देने का सामर्थ्य रखता हूं। इसके बाद हनुमान जी का रावण से 1-1 मुक्के का शर्त लगा। तब हनुमान जी ने रावण से कहा कि पहले तुम मुझे मारो, क्योंकि मेरा मुक्का खाने के बाद तुम में इतना भी सामर्थ्य नहीं बचेगा कि तुम दोबारा उठ सको।

जब रावण ने हनुमान जी को मुक्का मारा तब हनुमान जी थोड़ी देर के लिए क्षतिग्रस्त हो गए थे। उसके बाद क्रोध में हनुमान जी ने रावण के तरफ मुक्का उठाया तभी ब्रह्मा जी प्रकट हो गए और उन्होंने कहा कि ऐसा करने से प्रभु श्री राम का अवतार लेना व्यर्थ हो जाएगा। तब हनुमान जी ने अपना गुस्सा शांत किया।

प्रेम से बोले
जय श्री राम🙏🙏🙏जय हनुमान 🙏🙏🙏

27/04/2024

आधी आँख बंद करके देखें। अगर समझ में आ जाए तो प्रेम से बोले ____ ____ ________ 🙏🙏🙏














Want your school to be the top-listed School/college in Sitamarhi?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Telephone

Address

Sitamarhi