एक मन भ्रम में, एक भ्रम मन में
कुछ कविताएँ लिखी नहीं जातीं - वो उतरती हैं। यह कविता उस रात उतरी, जब मैं बहुत देर से एक सवाल के साथ बैठा था - “अगर भगवान मेरे अंदर ही है, तो डर किससे लग रहा है?” और तभी एक पंक्ति आई - “मैंने सोचा मैं अनुभव कर रहा हूँ / कहीं ‘मैं’ इन बातों से डर रहा हूँ” यह कविता एक यात्रा है - गागर से सागर तक। मिट्टी से ब्रह्म तक। ‘मैं’ से… उस जगह तक, जहाँ ‘मैं’ बचता ही नहीं। हम सब जानते हैं - ब्रह्म सत्य है, जगत मिथ्या है। पर जानना और जीना - इन दोनों के बीच की खाई ही तो पूरी ज़िंदगी है। इस कविता में मैंने वो खाई पार करने की कोशिश की है - शब्दों से नहीं, बल्कि शब्दों को मिटाते हुए। “स्वयं से मिलने को मैं मर रहा हूँ” - यह मृत्यु नहीं है। यह सबसे गहरी वापसी है। तुम्हारे कान भर दूँ, इससे पहले - एक बार पूरी कविता पढ़ो। धीरे-धीरे। जैसे कोई नदी में उतरता है - पाँव पहले। और फिर बताओ - कहाँ रुके? कौन सी पंक्ति ने पकड़ा? - आकाश ‘व्योम’ गोयल 🖤 — #ब्रह्म SpiritualPoetry हिंदीक
Cognition.93
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like a motivational and fun club and singer spirituality, adhyatmik charcha.
Sukh vyarth hai.
Osho motivational vichar
सच्चा सुख किसी से छीना नहीं जाता, वह भीतर पैदा होता है। वह ध्यान से आता है, प्रेम से आता है, जागरूकता से आता है।
मन की जांच करो तुम्हारे मन में जो भी है सब दूसरे का है। भीड़ का है।
अंधे से अंधा ही पैदा होता है #धृतराष्ट्र
ये प्रारंभ अद्भुत है।
महाभारत #धृतराष्ट्र
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भारत के उत्तर प्रदेश ग्राम। जजौली, पोस्ट । टेवा, तहसील मंझनपुर, कौशाम्बी
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