SAQIB ALI
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40 साल के आसपास की शहरी औरते, अब तो गाँव मे भी पड़ोस में बैठने का रिवाज खत्म हो गया है।
इस उम्र की औरतें बहुत अकेली हो जाती है।
क्योंकि इन औरतों का अपनी सहेलियो/फुफेरी/खलेरी/चचेरी बहनों से मेल-मिलाप उस दौर में खत्म हो जाता हैं जब इनके बच्चा होता है, उसकी परवरिश में एकदम से वक़्त नही मिलता, दुनिया से अनजान होकर औलाद को पालती है, फिर स्कूल भेजने में सुबह जागना, लंच बनाना, बाकि काम करके थककर सो जाना।
फिर औलाद इनकी जवान हो जाती है, जिनकी निर्भरता अब अपनी माँ पर खत्म हो जाती है, वो खुद स्कुल/कॉलेज या घूमने लायक हो जाते हैं। पति नौकरी में बिजी रहता है। शाम को आते हैं, औलाद अपने मोबाइल में बिजी, पति बुढापे और औलाद के फ्यूचर को सिक्यूर करने के तनाव में थककर सो जाता है। औऱ अब कोई बात बची भी नही होती जो दिलचस्पी से करे।
ऐसे अकेलेपन में एक मोबाइल सहारा होता है अपना वक़्त काटने का, कुछ दोस्त बनते है , जिनसे अपने मन की कह लेती हैं, सुन लेती है । लेकिन समाज के डर से इनके अंदर एक डर बना रहता है कि औलाद जवान है और यह मोबाइल में लगी रहती हैं ।इसलिए ऊंच नीच का ख्याल रखती है.. कुछ ऐसे अकेलेपन में भटक भी जाती हैं, सीमाएं लांघ जाती हैं।
इस उम्र में जो औरते मोबाइल नही इस्तेमाल करती उनके बच्चो की शादी तक तो बिल्कुल जीवन नीरसता रहती है। बच्चो की शादी के बाद, लड़के की बीवी से मनमुटाव हुआ तो जिंदगी में कुछ रौनके आ जाती हैं.. इधर उधर ही बुराई करने का कुछ काम मिल जाता है, दिन आसानी से कट जाता है।
ट्रेन के सफ़र के दौरान बराबर में 8-10 मरदूदों का परिवार भी कहीं जा रहा है. करीब आधा दर्जन बच्चे भी हैं उनके साथ. ऊ-ऊ की आवाज निकालकर चिचिया रहे हैं. आँखों से टसुए भी बह रहे हैं. इस पर परिवार के सब आदमी-औरत ताड़का जैसी हंसी हस रहे हैं. अब इस सब माहौल में सो तो मैं भी नहीं पा रहा, जैसे आदमी पड़ोसी की तरक्की से मन ही मन खुश होता है, वैसे ही मैं भी मन में खुश हो रहा हूं.
खैर, नीचे की बर्थ पर बैठे मर्द से यह दर्द झेला नहीं गया, उठकर दहाड़ पड़ा, समझा रहा है बच्चे कैसे 'हैंडल' किये जाते हैं. कैसे उन्हें चुप कराया जाता है. दूसरी तरफ से परिवार की एक मादा बोली बच्चे हैं तो रोएंगे ही. मर्द ने भी कार्ड खेला, मैं फौजी आदमी हूं, मेरे भी बच्चे हैं, श्रीनगर में देश की रक्षा कर रहा हूं, मेरे बच्चे तो नहीं रोते, और यहां तो बच्चों से ज्यादा आप लोग हल्ला कर रहे हो. दूसरी तरफ वाली मादा ने जवान के कार्ड को अंग विशेष पर रखते हुए जवाब दिया अजी हम तो एंजॉय कर रहे हैं, छुट्टियाँ हैं हमारी, ऐसे ही करेंगे.
इस पर जवान चिंघाड़ उठा मानो किसी चौपाये के लालफल पर पेट्रोल की फुरफुथी लगा दी हो, चिंघाड़ते हुए बोला ये क्या तरीका हुआ बात करने का. अब दूसरी तरफ से मादा को किनारे करते हुए नर आ गया जंग ए मैदान में. और मुंह से जवाबी बाण प्रत्यंचा पर चढ़ा रहा है. अब बच्चे शांत हो चुके हैं. आदमी सियार की तरह से हुयूँ हुयूँ हुयूँ करते हुए चिल्ला रहे हैं.
मैं, मेरा क्या है, बस इंतज़ार में हूँ, मुँह के बाणों से बात कुछ आगे बढ़े, चप्पल जूता गुम्मा चले, थोड़ा गुत्थम गुत्थी हो, तो किसी वकील के घर कुछ आमद बढ़े.
CP
59882 की ऑफिसियल खबर का इंतजार करो
फर्जी की ज्यादा उम्मीद हैं
आपके सबसे ज्यादा पैसे किसी ने उधार लेकर नहीं दिए
मेरे 2000
अब मै किसी को उधार नहीं देता
अभी मैं जहां रह रहा हूँ,यहां मैं पिछले 4-5 महीने से हूं।जब मैं मार्किट अपनी रोजमर्रा की चीजें खरीदने के लिए मार्किट गया तो देखा कि एक सब्जी वाले के यहां भीड़ है तो मैं वहीं चला गया सब्जी लिया चला आया।दूसरे दिन उसी सब्जी वाले को paytm से पे किया तो पता चला कि वो मुस्लिम है।वो 20-22 साल का लड़का है तो मैं एक दिन पूछा कि स्टडी कहाँ तक किये हो,कहा कि इंटर तक।मैं पूछा कि ग्रेजुएशन क्यों नहीं किये तो बोला कि भैया इसी में लग गए।उसकी सब्जी की दुकान खूब चलती है तो मैं कहा कि दुकान चलाओ पर प्राइवेट ग्रेजुएशन भी कर लो,कहा कि भैया देखते हैं।
ऐसे ही एक दिन दूसरे दुकान पर गया तो वो लड़का भी इतने उम्र का है मुस्लिम है।यह लड़का अपने पिता जी के साथ बैठता है और इसकी भी दुकान खूब चलती है और यह हाई स्कूल पास है।इन्ही लोगों के बगल में एक लड़का अंडे की दुकान रखा हुआ है और उसकी भी खूब चलती है और मुझे लगता है कि हजारों अंडे डेली बेचता होगा।इन्हीं लोगों से 100 मीटर दूर एक चिकेन शॉप है।इसकी दुकान भी बहुत चलती है।
इन चारों में जो कॉमन बात है वह यह है कि ये चारों मुस्लिम है और ऐसी जगह बेहतरीन तरीक़े से दुकान चला रहें हैं जहाँ मुस्लिम बहुत कम है।इनकी खास बात यह है कि ये व्यवहार कुशल है,सही और शुद्ध समान रखते हैं,वाजिब कीमत है और साफ सफाई है.........जब लोगों को सही दाम पर सही समान मिलता है तो इससे किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता है कि वो किस धर्म के है क्योंकि निजी तौर पर लोग अपने फायदे नुकसान देखकर काम करते हैं।
EToN की बिरयानी इलाहाबाद में मिलती है यह मुस्लिम मालिक की है।जो यहां का प्रबंधन देखता है बाकायदा नमाजी टोपी लगातार बैठता है और बीसों लड़के काम करने वाले हैं।आप देखोगे कि हर समय 100 लोग खाते मिलेंगे और हर समय पचासों गाड़ी खड़ी रहेगी और लोग हर समय आते रहते हैं मतलब कि बहुत चलती है।इसकी वजह है,बेहतरीन टेस्ट,वाजिब कीमत,अच्छा लोकेशन, खूब स्पेस,अच्छा व्यवहार, साफ सफाई बहुत अच्छी,5 मिनट भी आपको वेट नहीं करना पड़ेगा।
जब इतनी बेहतरीन सर्विस है तो लोगों को कोई फर्क पड़ रहा है कि ये किस जाति धर्म के हैं?नहीं, बिलकुल नहीं।ये होते हैं बिजनेस के गुर।यह देखकर अच्छा लगता है कि ये कितनी कुशलता से चीजों को आगे बढ़ा रहें हैं।आज छोटे छोटे बिजनेस में कुशल हो और एक दिन ऐसा आएगा कि बड़े बड़े बिजनेस में कामयाबी मिलेगी,बस सही तरबियत,ईमानदारी और अपने मूल्यों को पकड़कर मेहनत करते रहो।
गैर शैक्षणिक कार्यों ने भले ही चारों तरफ से हम सभी पर हमला बोल रखा हो,
...............पर हर हफ्ते में कोई ना कोई आकर बोल ही देता है “राजा की नौकरी बस तुम्हारी है" 😀🙏
भारतीय ट्रेन के एक डिब्बे में हर तरह के लोग मिल जाते हैं:
मुफ़्त में ज़िंदगी की नसीहतें देने वाले अंकल
पूरे कोच को खेल का मैदान समझने वाला बच्चा
आपकी बर्थ पर "बस थोड़ी देर के लिए" बैठा मुसाफ़िर
"भैया, फोन चार्ज पर लगा दूँ?" पूछने वाला यात्री
इंजन से भी ज़्यादा आवाज़ में खर्राटे मारने वाला चैम्पियन
रात 10 बजे पूरा खाना खोलकर दावत जमाने वाला ग्रुप
अपने सामान की हिफ़ाज़त ऐसे करने वाला जैसे कोई क़ौमी ख़ज़ाना हो
और वह ख़ामोश इंट्रोवर्ट जो दुआ कर रहा होता है कि कोई उससे बात शुरू न कर दे
एक डिब्बा...पूरा हिंदुस्तान।
15/06/2026
भारत के चैनल
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