Govt Hr Sec School Wadrafnagar

Govt Hr Sec School Wadrafnagar

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It is the best school of this district.

Photos from Dr. Premsai Singh's post 02/09/2021
Photos from Govt Hr Sec School Wadrafnagar's post 03/07/2021

समय और बदलाव

अब आपके High School का नाम "Swami Atmanand Govt. Utkrisht English Medium Higher Secondary School" हो गया है। आशा है कि इसी के साथ बेहतर शिक्षा एवं सुविधा का लाभ सभी विद्यार्थियों को प्राप्त होगा।

29/01/2020

बसंत पंचमी की हार्दिक शुभेच्छा 🌻🌺🌾🌺🌻
हे ब्रह्मसुता!हे पद्मसुशोभिनी!मालस्फटिक धारी है
लय-सुर -रस संगीत कलाएं , मां सब देन तुम्हारी है
-पल्लवी-

27/10/2017

आभार *******
हम देहात गांव से निकले बच्चे हैं साहब। दूसरी कक्षा तक घर से तख्ती लेकर स्कूल गए थे। स्लेट को जीभ से चाटकर अक्षर मिटाने की हमारी स्थाई आदत रही है।
स्कूल में टाट पट्टी क अनुपलब्धता में घर से खाद या बोरी को बैठने के लिए बगल में दबा कर भी ले जातें थे। कक्षा छः में पहली दफा हमनें अंग्रेजी का कायदा पढ़ा और पहली बार एबीसीडी देखी। स्मॉल लेटर में बढ़िया एफ बनाना हमें बारहवीं तक भी न आया था। हम देहात के बच्चों की अपनी एक अलग दुनिया थी। कपड़े के बस्ते में किताब और कापियां लगाने का विन्यास हमारा अधिकतम रचनात्मक कौशल था। पटरी पोतने की तन्मयता हमारी एक किस्म की साधना ही थी। हर साल जब नई कक्षा में आने पर दूसरों को दी गईं किताबें मिलती तब उन पर पुट्ठा(कवर) चढ़ाना हमारे जीवन का स्थाई उत्सव था। साईकिल से रोज़ सुबह कतार बना कर आना और साईकिल की रेस लगाना हमारे जीवन की अधिकतम प्रतिस्पर्धा थी। हर तीसरे दिन पंप को बड़ी युक्ति से दोनों टांगो के मध्य फंसाकर साईकिल में हवा भरतें मगर फिर भी खुद की पेंट को हम काली होने से बचा न पाते थे। स्कूल में पिटते मुर्गा बनतें मगर हमारा ईगो हमें कभी परेशान न करता, हम देहात के बच्चें शायद तब तक जानते नही थे कि ईगो होता क्या है। क्लास की पिटाई का रंज अगले घंटे तक काफूर हो गया होता और हम अपनी पूरी खिलदण्डिता से हंसते पाए जाते। रोज़ सुबह प्रार्थना के समय पीटी के दौरान एक हाथ फांसला लेना होता मगर फिर भी धक्का मुक्की में अड़ते भिड़ते सावधान विश्राम करते रहते। हम देहात के निकले बच्चें सपनें देखने का सलीका नही सीख पातें अपनें माँ बाप को ये कभी नही बता पातें कि हम उन्हें कितना प्यार करते हैं। हम देहात से निकले बच्चें गिरतें सम्भलतें लड़ते भिड़ते दुनिया का हिस्सा बनतें है, कुछ मंजिल पा जाते है कुछ यूं ही खो जाते है। पढ़ाई फिर नौकरी के सिलसिलें में लाख शहर में रहें लेकिन हम देहात के बच्चों के अपने देहाती संकोच जीवन भर बरकरार रहते हैं।

23/10/2017
11/09/2017

सुनों कुछ नहीं भूलें हैं ❤
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वो बचपन का खेला,वो कपड़ा मैला, वो गांव का मेला,
वो जलेबी का ठेला ।।

वो मछली जल की रानी, वो कविता तेरी जुबानी, वो बढती मेरी शैतानी, वो किताबों की घिचा तानी ।।

वो तेरा स्कूल जाना, वो मनोज तिवारी का गाना, वो तुम्हारा छत पर आना,वो मेरा मुस्कुराना ।।

वो तेरा ट्यूशन जाना, वो मेरा पिछे आना, वो गोलगप्पे खाना
वो देर का बहाना ।।

वो तेरी गलियां, वो मेरी रंग रलियां, वो उड़ती तितलियाँ
वो हंसती सहेलियां ।।

वो तेरा दूर जाना, वो मेरा बैचैन हो जाना,वो तेरा टिफ़िन खाना
वो गुज़रा ज़माना ।।

वो जमाने का डर, वो रात का पहर, वो बहती नहर
वो तेरी बांतो का कहर।।

वो हाथों पे हाथ, वो आखिरी मुलाकात, वो तेरे जज्बात
वो बहुत सारी बात ।।

सब याद है ।।

04/09/2016

गुरु का महत्व कभी होगा न कम ,
भले कर ले कितनी भी उन्नति हम ,
वैसे तो है इन्टरनेट पे हर प्रकार का ज्ञान ,
पर अच्छे बुरे की नहीं है उसे पहचान |

नहीं हैं शब्द कैसे करूँ धन्यवाद ,
बस चाहिए हर पल आप सबका आशीर्वाद ,
हूँ जहाँ आज मैं उसमे हैं बड़ा योगदान ,
आप सबका जिन्होंने दिया मुझे इतना ज्ञान |

आपने बनाया है मुझे इस योग्य ,
की प्राप्त करूँ मैं अपना लक्ष्य ,
दिया है हर समय आपने सहारा ,
जब भी लगा मुझे की मैं हारा |

पर मैं हूँ कितना मतलबी ,
याद किया न मैंने आपको कभी ,
आज करता हूँ दिल से आप सब का सम्मान ,
आप सब को है मेरा सत सत प्रणाम |


07/06/2016

एक तो आज कल ये बहुत चल रहा है...
चाणक्य का पडोसी...
चाणक्य की मौसीका लड़का
चाणक्य की कॉलोनी का एक लड़का
चाणक्य का दूर का रिश्तेदार..
चाणक्य का ये....
चाणक्य का वो...
क्या है ये सब....

अबे यार ज्ञान बाटना है तो अपने नाम से बांटो
चाणक्य के नाम का प्रयोग क्यों करते हो?

ये अच्छी बात नही-चाणक्य का बाप। ;-)

01/05/2016

मजदूर दिवस पर विशेष----------
"न हुस्न चाहिए न हमें प्यार चाहिए.
बस रोज शाम को हमें पगार चाहिए"

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