27/06/2026
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27/06/2026
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26/06/2026
नर्मदा घाटी की उपजाऊ मिट्टी और विशेष जलवायु में तैयार होने वाले जबलपुरी मटर (Jabalpuri Matar) और जबलपुर सिंघाड़ा (Jabalpur Singhada) को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication) टैग (GI Tag) मिल गया है. इसके साथ ही जबलपुर देश का पहला ऐसा क्षेत्र बन गया है, जहां के मटर और सिंघाड़े को जीआई टैग की मान्यता प्राप्त हुई है
26/06/2026
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25/06/2026
मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध 'रतलामी गराड़ू' (मालवी गराड़ू) को हाल ही में आधिकारिक GI टैग (Geographical Indication Tag) दिया गया है। यह विशेष पहचान इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक अलग और प्रामाणिक पहचान दिलाती है।
रतलामी गराड़ू के बारे में मुख्य बातें:
क्या है गराड़ू: यह एक प्रकार का कंद (tuber) है जो सर्दियों के मौसम में मालवा क्षेत्र में बहुत लोकप्रिय है।
जीआई टैग मान्यता: रतलाम और आसपास के क्षेत्रों के गराड़ू को 'मालवी गराड़ू' के नाम से यह भौगोलिक संकेतक मिला है।
यह क्यों खास है: इसकी मिट्टी, विशेष मौसम और पारंपरिक खेती की विधि इसे अद्वितीय और स्वादिष्ट बनाती है।
25/06/2026
रतलाम जिले (विशेषकर सैलाना क्षेत्र) की प्रसिद्ध बालम ककड़ी को भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग मिल चुका है। इसे "सैलाना बालम ककड़ी" के नाम से यह सम्मान दिया गया है।
बालम ककड़ी अपने बड़े आकार, केसरिया-पीले रंग और रसीले स्वाद के लिए बहुत लोकप्रिय है।
24/06/2026
बुरहानपुर के केले को जीआई (Geographical Indication) टैग मिल गया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि से बुरहानपुर जिले के 18 हजार से अधिक किसानों और स्थानीय कृषि उद्योग को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और भारी लाभ मिलेगा।
जीआई टैग मिलने से जुड़ी मुख्य बातें:
अंतरराष्ट्रीय पहचान: जीआई टैग मिलने से अब बुरहानपुर के केले को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में निर्यात करने के नए रास्ते खुल गए हैं।
किसानों को लाभ: इस टैग से लगभग 18,640 किसानों को अपनी उपज की बेहतर कीमत मिलने की उम्मीद है।
उत्पादन का दायरा: बुरहानपुर में लगभग 26,120 हेक्टेयर क्षेत्र में हर साल करीब 18 लाख मीट्रिक टन केले का रिकॉर्ड उत्पादन होता है।
स्थानीय रोजगार: जिले में एक जिला-एक उत्पाद (ODOP) योजना के तहत 55 से अधिक बनाना प्रोसेसिंग यूनिट्स भी काम कर रही हैं, जिनसे चिप्स और अन्य उत्पाद बनते हैं।
24/06/2026
मध्य प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय ने हाल ही में जमीन खरीद से जुड़े आरोपों के संबंध में स्पष्टीकरण जारी किया है।
आधिकारिक बयान के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव या उनके परिवार द्वारा 2023 के बाद से कोई जमीन नहीं खरीदी गई है।
यह स्पष्टीकरण इस मामले पर चल रही सार्वजनिक चर्चाओं और दावों के बीच आया है।
अधिकारियों ने नागरिकों से सत्यापित जानकारी और आधिकारिक स्रोतों का संदर्भ लेने का आग्रह किया है।
24/06/2026
हाल ही में मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित ऐतिहासिक शहर मांडू की प्रसिद्ध खुरासानी इमली (Khurasani Imli GI Tag) को आधिकारिक तौर पर भौगोलिक संकेत (जीआई) टैग प्रदान किया गया। यह भारत के प्रतिष्ठित जीआई टैग (GI Tag India) सूची में शामिल होने वाला एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पाद बन गया है।
खुरासानी इमली से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु:
उत्पत्ति: यह फल वास्तव में अफ्रीका के विशाल बाओबाब वृक्ष (Baobab tree) का फल है।
ऐसा माना जाता है कि 14वीं शताब्दी में महमूद खिलजी के शासनकाल के दौरान अफगान और अरब व्यापारी इस वृक्ष को मांडू लेकर आए थे।
भौगोलिक क्षेत्र: वर्तमान में मध्य प्रदेश का मांडू क्षेत्र भारत में इन दुर्लभ वृक्षों का सबसे बड़ा केंद्र है। यह स्थानीय स्तर पर उगाई जाने वाली एक स्वदेशी उपज (Indigenous Produce) के रूप में प्रसिद्ध हो चुकी है।
विशेषताएँ और स्वाद: सामान्य इमली की तुलना में खुरासानी इमली का स्वाद हल्का खट्टा-मीठा होता है।
इसका फल हल्के हरे रंग का होता है जिसके गूदे में प्रचुर मात्रा में विटामिन-सी, एंटीऑक्सीडेंट और आवश्यक खनिज पाए जाते हैं।
औषधीय महत्व: स्थानीय आदिवासी समुदाय पीढ़ियों से इस कृषि विरासत (Agricultural Heritage) को संजोए हुए हैं। आदिवासी वैद्य इसके गूदे, बीज और सूखी छाल का उपयोग पाचन संबंधी बीमारियों, बुखार, थकान और मधुमेह के इलाज में करते हैं।
आर्थिक प्रभाव: जीआई मान्यता (GI Recognition) मिलने से स्थानीय स्तर पर निर्मित बाओबाब जूस और छाल से बने उत्पादों की ब्रांडिंग मजबूत होगी।
इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) को गति मिलेगी और अब तक सड़क किनारे उत्पाद बेचने वाले आदिवासियों को सही मूल्य मिलेगा।
24/06/2026
इन दिग्गजों ने न केवल मैच जीते और रिकॉर्ड तोड़े, बल्कि उन्होंने देश द्वारा दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान भी अर्जित किए।