पहेली
क्या आप बता सकते है ये गोल गोल गोले किसके और क्यों बनाए जा रहे हैं
Indigo, thebluegold
The place to love - nature given organic plant INDIGO with the workshops, classes, studio, experienc
21/12/2022
CCWA Natural Indigo-The Sustainable Fashion Revolution
Friday, 23 December · 7:00 – 9:00pm
Google Meet joining info
Video call link: https://meet.google.com/cei-tsgm-kyc
Or dial: (US) +1 475-441-4696 PIN: 960 080 293 #
More phone numbers: https://tel.meet/cei-tsgm-kyc?pin=8605703929334
08/12/2022
23 दिसंबर को हम पिछले वर्षो कि भांती नील दिवस मनायेंगे, क्या आप तैयार हैं?
शिल्पवाली हवेली के हवाले से
Like previous years, we will celebrate Indigo Day on 23rd December, are you ready?
12/10/2020
CCWA:- is first Craft council formed by Artisans,for artisans & governed by artisan to stay together
CCWA: - कारीगरों द्वारा बनाई गई पहली क्राफ्ट काउंसिल है, जो कारीगरों के लिए और कारीगरों द्वारा एक साथ रहने के लिए शासित है
26/09/2020
2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती व विश्व अहिंसा दिवस पर श्रृंखला 01
चरखे की खोज मे पवित्र खादी या खद्दर का जन्म (देश की जड़ों से जुड़ा स्वदेशी कपड़ा)
मौन धारण-Silence holding-મૌન પકડી રાખવું-নীরবতা ধরে রাখা
(मौन धारण करना एक बड़ी साधना है, मौन से मन की शक्ति भी बढ़ती है)
मौन से मन की शक्ति बढ़ती है। शक्तिशाली मन में किसी भी प्रकार का भय, क्रोध, चिंता और व्यग्रता नहीं रहती। मौन का अभ्यास करने से सभी प्रकार के मानसिक विकार समाप्त हो जाते हैं। मौन व्रत अपने आप में एक अनूठा व्रत है। इस व्रत का प्रभाव लंबे समय तक रहता है। इसका पालन करने के लिए किसी खास दिन, तिथि व क्षण की अवश्यकता नहीं होती बल्कि कभी भी समय की मर्यादा और उसके अंदर बंधकर किया जा सकता है। सबसे बड़ी बात जो लोग भूखे रहने से कतराते हैं,उनके लिए तो ये व्रत किसी वरदान से कम नहीं। चुप्पी का अभ्यास करना मौन की आपकी समझ को विस्तृत करने का एक तरीका है और यह देखने के लिए शुरू होता है कि मन के अंदर शोर की मात्रा वास्तव में कितनी गहराई से है कुछ हफ्ते में, एक दिन या कम से कम कुछ घंटों को चुप्पी देने का विचार करें।
हिन्दू,राष्ट्रपिता (बापू यानी पिता) महात्मा गाँधी सप्ताह में एक दिन मौन धारण करते थे.उनका मानना था कि बोलने के परहेज से उन्हें आतंरिक शान्ति (inner peace) मिलती है। मौन धारण के दिनों में वे कागज पर लिखकर दूसरों के साथ संपर्क करते थे। 37 वर्ष की आयु से साढ़े तीन वर्षों तक गांधी जी ने अख़बारों को पढ़ने से इंकार कर दिया जिसके जवाब में उनका कहना था कि जगत की आज जो स्थिर अवस्था है उसने उसे अपनी स्वयं की आंतरिक अशांति की तुलना में अधिक भ्रमित किया है।
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18/09/2020
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Shilpi Sansthan, Workshop Brij Ballabh Udaiwal, Ratalya
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