Jaunpur City

Jaunpur City

Share

Jaunpur City Jaunpur, situated on the bank of River Gomti, is a historical city. It was founded by Firoz Shah Tughlaq in 14th century.

The name Jaunpur attributes its origin to the cousin of Firoz Shah Tughlaq, called Sultan Mohammad, whose real name was Jauna. Later around 1394 AD, Malik Sarvar - the governor of Jaunpur, established an independent Sharqi dynasty that ruled over Jaunpur for about a century. Sharqi rulers were great patrons of architecture and constructed many fine tombs, mosques, madarsas here, during their regim

Photos from Jaunpur City's post 18/10/2020

सुबह- ए- शाही पुल
शाही पुल का एक और रंग😘😘

08/06/2019
22/08/2016

जौनपुर एक नगर हैं,
बसा गोमती तीर।
सीधे साधे नागरिक,
देश भक्त और बीर।।
सदर,केराकत,मडियाहू,
बसे नगर के तीर।
शाहगंज मछलीशहर ,
बदलापुर ताहसिल।।
वरुणा,बसुई,पिली,
और सई गोमती तीर।
राम लखन सीता सहित,
ग्रहण किये यहाँ नीर।।
त्रिमुहानी,शाहीकिला,
अटाला और नूर।
शाहीपुल,भूलभुलैया,
टूर करो भरपूर।।
चौकिया माँ का धाम है,
त्रिलोचन शिव धाम।
मुरई,मिर्चा,इमरती,
खरबूजा है सरनाम।।
कशी का एक भाग यह ,
प्रयाग राज नजदीक।
सड़क,एअरपोर्ट,रेलमार्ग,
महामार्ग नजदीक।।
लोग यहाँ के मेहनती,
साहस से भरपुर।
हाबड़ा,दिल्ली,मुम्बई,
बसे हुए बंगलूर।।
जनगण मन जै जौनपुर
करते हम जयगान।
स्वर्ग से सुन्दर मातृभूमि
तुझे साष्टांग प्रणाम।।
सभी जौनपुरीया भाइयों को समर्पित I

महज 75 घरों वाला गाँव जहाँ हैं 47 IAS, यही नही ! इसरो, भाभा और विश्व बैंक के अफसर भी 20/04/2016

महज 75 घरों वाला गाँव जहाँ हैं 47 IAS, यही नही ! इसरो, भाभा और विश्व बैंक के अफसर भी शहरों की ओर पलायन करते हिन्दुस्तान का सच यही है कि गांवों में शिक्षा के स्तर को लेकर ऐसा नही माना गया है जहाँ से देश को आईएस, या अन्य सेवाओं में बड़े अफसर मिल सकें। इसी सोच को लेकर देखते ही देखते लगभग पूरे हिन्दुस्तान के गाँव शहरों की और पलायन की राह देखने लगे। लेकिन एक गाँव हिन्दुस्तान में ऐसा भी है…

Photos 08/08/2015

जौनपुर की एतेहासिक अटाला मस्ज़िद-
_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_-_
अटाला मस्जिद जौनपुर के उत्तरी क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन मस्जिद है.फिरोजशाह ने 1393 ई0 में अटाला मस्जिद की नींव डाली थी, लेकिन 1408 ई0 में इब्राहिम शाह ने पूरा कराया. इसे जौनपुर में अन्य मस्जिदों के निर्माण के लिये आदर्श माना गया. इसकी ऊँचाई 100 फीट से अधिक है.इस मस्जिद में कलात्मक दीवारों के साथ चारो तरफ सुन्दर दीर्घा का निर्माण किया गया था.मस्जिद में प्रवेश के लिए तीन विशाल प्रवेश द्वार हैं. मस्जिद की कुल परिधि 248 फीट है.अटाला मस्जिद शर्की वास्तुकला का बेहतरीन नमूना है.यह मस्जिद ग्रे बलुआ पत्थर और ग्रेनाइट से बनी है. मस्जिद की उल्लेखनीय विशेषता इसका प्रार्थना हॉल है.

Photos 01/05/2014

Jaunpur, situated on the bank of River Gomti, is a historical city. It was founded by Firoz Shah Tughlaq in 14th century. The name Jaunpur attributes its origin to the cousin of Firoz Shah Tughlaq, called Sultan Mohammad, whose real name was Jauna. Later around 1394 AD, Malik Sarvar - the governor of Jaunpur, established an independent Sharqi dynasty that ruled over Jaunpur for about a century. Sharqi rulers were great patrons of architecture and constructed many fine tombs, mosques, madarsas here, during their regime. Jaunpur was a renowned centre of Art & Learning during medieval period.
There are a large number of tourist attraction spots and magnificent monuments in Jaunpur. Most of these monuments were constructed during medieval period, which shows the glory of the city during that period. Many ghats have been built along the River Gomti, viz., Hanuman Ghat, Achala Ghat etc.

Photos 29/04/2014

Jaunpur city-गोमती नदी पर बने इस खूबसूरत ब्रिज को मुनीम खान ने 1568 ई. में बनवाया था।शर्कीकाल में जौनपुर में अनेकों भव्‍य भवनों, मस्‍जि‍दों व मकबरों का र्नि‍माण हुआ. फि‍रोजशाह ने 1393 ई0 में अटाला मस्‍जि‍द की नींव डाली थी, लेकि‍न 14...08 ई0 में इब्राहि‍म शाह ने पूरा कि‍या.इब्राहि‍म शाह ने जामा मस्‍जि‍द एवं बड़ी मस्‍जि‍द का र्नि‍माण प्रारम्‍भ कराया, इसे हूसेन शाह ने पूरा कि‍या। शि‍क्षा, संस्‍क़ृति‍, संगीत, कला और साहि‍त्‍य के क्षेत्र में अपना महत्‍वपूर्ण स्‍थान रखने वाले जनपद जौनपुर में हि‍न्‍दू- मुस्‍लि‍म साम्‍प्रदायि‍क सद् भाव का जो अनूठा स्‍वरूप शर्कीकाल में वि‍द्यमान रहा है, उसकी गंध आज भी वि‍द्यमान है.

Photos 29/04/2014

जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती 153 वर्ष पुरानी हो चुकी है और उसका स्वाद और गुणवत्ता अभी भी बरकरार है। जौनपुर से जो भी व्यक्ति अपनी रिश्तेदारी या मित्रों के यहां जाता है वह यहां की प्रसिद्ध बेनी की इमरती जरूर ले जाता है।

Photos 18/04/2014

जौनपुर शहर के नक्खास मुहल्ले के निवासी बेनीराम देवी प्रसाद ने सन1855 से अपनी दुकान पर देशी घी की ‘इमरती’ बनाना शुरू किया था। उस समय देश गुलाम था फिर भी बेनीराम देवीप्रसाद ने अपनी इमरती की श्रेष्ठता एवं स्वाद बरकरार रखा। बेनी राम देवीप्रसाद के बाद उनके लड़के बैजनाथ प्रसाद, सीताराम व पुरषोत्तम दास ने अपना कारोबार बढ़ाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। इन लोगों ने भी जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती की महक बनाए रखी।
इसके बाद विष्णु चन्द, प्रेमचन्द एवं जवाहरलाल ने इमरती को देश के बाहर भेजने का काम शुरू किया। अब जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती को बेनीराम देवी प्रसाद की चौथी पीढ़ी के वंशजों रवीन्द्रनाथ, गोविन्, धर्मवीर एवं विशाल ने पूरी तरह से संभाल लिया है। जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती की खासियत यह है कि यह हरे उड़द, देशी चीनी और देशी घी से लकड़ी की आंच परही बनाई जाती है। उड़द की दाल को सिल-बट्टे से पिसवाया जाता है।
इमरती के लिए देशी चीनी आज भी बलिया से मंगाई जाती है। देशी चीनी और देशी घी में बनने के कारण इमरती गरम होने और ठंडी रहने पर भी मुलायम रहती है। बिना फ्रिज के इस इमरती को कम सेकम दस दिन तक सही हालत में रखा जा सकता है।
जौनपुर की प्रसिद्ध इमरती 153 वर्ष पुरानी हो चुकी है और उसका स्वाद और गुणवत्ता अभी भी बरकरार है। जौनपुर से जो भी व्यक्ति अपनी रिश्तेदारी या मित्रों के यहां जाता है वह यहां की प्रसिद्ध बेनी की इमरती जरूर ले जाता है।

Photos 18/04/2014

जौनपुर शहर से करीब 6 किमी0 दूर केराकत मार्ग परधर्मापुर में एक दर्शनीय शिव मंदिर है.अमृ्तसर के स्वर्णमंदिर की शैली में इसे सरोवर के बीच बनाया गया है.करीब सौ वर्ष पूर्व तत्कालीन जौनपुर नरेश राजा श्रीकृष्ण दत्त दुबे ने इसका निर्माण कराया था.उन्होंने अपने वंशजों से इस मंदिर के प्रति प्रेम रखने का आग्रह भी किया था.निर्माण शिलालेख पर इसका जिक्र भी है-
भावी भूपति सब यहाँ, पालहि प्रेम विशेष ।
बार बार कर जोरि यह,याचत कृष्ण नरेश ।।

Photos from Jaunpur City's post 01/02/2014

Its happen only in Jaunpur City !!!

Photos from Jaunpur City's post 14/01/2014

What is written on a pillar placed outside the gateway of Jaunpur Fort?
Pillar Near Turkish Hamam-
Another six feet high pillar with 17 lines of Persian prose is placed outside the gateway. It dates back to 1769 and exhorts al Muslim and Hindu kotwals of the fort to continue the allowance, possibly to the descendants of the Sharqis. The inscription continues:

“I administer oath to a Muslim in the name of God and His prophet; and if he is a Hindu I give him the oath in the name of Ram, Ganges and tribeni. If he does not act upon this deed he will be cursed by God and his Prophet and if God wishes his face will be blackened on the Resurrection day, and he will go to Hell.”

Want your school to be the top-listed School/college in Jaunpur?

Click here to claim your Sponsored Listing.

Location

Website

Address


Jaunpur