The Zone Academy Barwadih

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An institute to give your success (for class:-1st to 12th (Arts)
Maths + Science+English by PANCHAM SIR
Hindi + Social Science by KANCHAN SIR

23/06/2026

अहंकार की ऊँची दीवार, पल में ढह जाती है,
समय की एक ठोकर, औकात बता जाती है।
जो खुद को सबसे बड़ा समझते हैं इस जहान

23/06/2026

The reality of love 💕💕💕💕

22/06/2026

Reels वाली लड़कियां एक बार इस वीडियो को पूरा देखो।

21/06/2026

एक लड़का ऐसा भी...
गांव के एक छोटे से घर में रहने वाला रवि बचपन से ही बहुत होनहार था। उसका सपना था कि वह खूब पढ़े-लिखे और अपने माता-पिता का नाम रोशन करे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
जब रवि आठवीं कक्षा में था, तभी एक दुर्घटना में उसके माता-पिता इस दुनिया को छोड़कर चले गए। एक ही पल में उसके सिर से मां की ममता और पिता का साया उठ गया। गरीबी पहले से थी, अब सहारा भी नहीं रहा।
मजबूरी में रवि को अपनी किताबें बंद करनी पड़ीं। जिस उम्र में बच्चे स्कूल जाते हैं, उस उम्र में उसने मजदूरी करना शुरू कर दिया। दिन भर ईंट-गारा ढोता और रात को अपने माता-पिता की तस्वीर देखकर रोता था।
एक दिन वह एक निर्माण स्थल पर काम कर रहा था। वहां कई मजदूर काम कर रहे थे, जिनमें एक गरीब परिवार की नाबालिग लड़की भी थी, जो अपने घर की मजबूरी के कारण मजदूरी कर रही थी।
दोपहर के समय कुछ आवारा युवक वहां आए और उस लड़की को परेशान करने लगे। लड़की डर के मारे कांप रही थी। उसकी आंखों में आंसू थे, लेकिन मदद के लिए कोई आगे नहीं आ रहा था।
तभी रवि की नजर उस तरफ पड़ी।
उसे अपनी मां की एक बात याद आ गई— "बेटा, कभी किसी की बेटी या बहन पर मुसीबत आए तो उसे अपनी बहन समझकर उसकी रक्षा करना।"
रवि बिना कुछ सोचे उन युवकों के सामने खड़ा हो गया।
"यह मेरी बहन जैसी है, इसे परेशान मत करो," उसने दृढ़ आवाज में कहा।
युवकों ने उसका मजाक उड़ाया, लेकिन रवि पीछे नहीं हटा। उसने शोर मचाया, आसपास के लोगों को बुलाया और उन बदमाशों को वहां से भगा दिया।
लड़की रोते हुए रवि के पैरों के पास बैठ गई और बोली, "भैया, आज आप नहीं आते तो पता नहीं मेरे साथ क्या हो जाता।"
यह सुनकर रवि की आंखें भर आईं।
उसने लड़की के सिर पर हाथ रखा और कहा, "मेरी कोई सगी बहन नहीं है, लेकिन आज से तुम मेरी बहन हो।"
उस दिन पहली बार वर्षों बाद रवि को ऐसा लगा जैसे उसके माता-पिता कहीं से उसे देख रहे हों और उस पर गर्व कर रहे हों।
लोगों ने देखा कि जिसके पास न धन था, न बड़ी नौकरी, न ऊंची पढ़ाई... फिर भी उसके पास सबसे बड़ी दौलत थी—अच्छा चरित्र और इंसानियत।
सीख:
"इंसान की महानता उसके कपड़ों, पैसे या पढ़ाई से नहीं, बल्कि उसके कर्मों से पहचानी जाती है। जो दूसरों की इज्जत बचाता है, वही सच्चा इंसान कहलाता है।" 🌹🙏
-By PANCHAM SIR

21/06/2026

This is not reel, it is reality

21/06/2026

आपके घर की हालत जरूर बदलेगी

20/06/2026

आप अपनी राय दे सकते हैं.....

19/06/2026

Dj बना दिया... My son

19/06/2026

एक शिक्षक की असली कमाई
एक दिन मैं अपनी कोचिंग में बच्चों को पढ़ा रहा था। क्लास खत्म होने ही वाली थी कि अचानक एक युवती मेरे पास आकर खड़ी हो गई।
पहले तो मैं उसे पहचान नहीं पाया। उसने मुस्कुराते हुए कहा, "सर, क्या आपने मुझे पहचाना?"
मैंने ध्यान से देखा, लेकिन याद नहीं आया।
तब उसने कहा, "सर, मैं वही लड़की हूँ जिसे लोग पढ़ाई में एवरेज कहते थे। जिसके कम नंबर देखकर सब कहते थे कि इससे कुछ नहीं होगा।"
इतना सुनते ही मुझे उसका चेहरा याद आ गया।
वह सचमुच एक साधारण छात्रा थी। न वह क्लास की टॉपर थी, न ही उसकी कॉपी में हमेशा अच्छे अंक आते थे। कई बार वह सवालों में गलती करती, कई बार निराश होकर रो भी पड़ती थी।
एक दिन उसने मुझसे कहा था, "सर, शायद पढ़ाई मेरे बस की बात नहीं है।"
तब मैंने उससे सिर्फ इतना कहा था, "बेटी, तेज दौड़ने वाला ही मंजिल तक पहुँचे, यह जरूरी नहीं। जो रुकता नहीं है, वह भी एक दिन मंजिल पा लेता है।"
उस दिन के बाद उसने हार मानना छोड़ दिया।
आज वह मेरे सामने खड़ी थी। उसकी आँखों में चमक थी और हाथ में एक नियुक्ति पत्र।
उसने काँपती हुई आवाज़ में कहा, "सर, आज मेरी सरकारी नौकरी लग गई है। सबसे पहले यह खुशखबरी आपको देने आई हूँ।"
इतना कहकर उसने मेरे चरण छू लिए।
उसकी आँखों से आँसू बह रहे थे, और सच कहूँ तो मेरी आँखें भी नम हो गईं।
उसने कहा, "सर, जब पूरी दुनिया मेरी कमजोरियाँ गिना रही थी, तब आपने मुझमें मेरी ताकत दिखाई थी। अगर उस दिन आप मेरा हौसला न बढ़ाते, तो शायद मैं आज यहाँ तक नहीं पहुँच पाती।"
उस पल मुझे एहसास हुआ कि शिक्षक की असली कमाई पैसे नहीं होते।
शिक्षक की असली कमाई वह दिन होता है, जब उसका कोई विद्यार्थी सफलता की ऊँचाइयों पर पहुँचकर कहता है—
"सर, मेरी इस सफलता में आपका भी हिस्सा है।"
उस दिन मैंने महसूस किया कि दुनिया की सबसे बड़ी दौलत बैंक के खाते में नहीं, बल्कि अपने विद्यार्थियों की सफलता में छिपी होती है।
एक शिक्षक की तनख्वाह महीने में मिलती है, लेकिन उसकी असली कमाई उसके विद्यार्थियों की सफलता और उनके सम्मान में मिलती है।
-By PANCHAM SIR

19/06/2026

वीडियो लंबी जरूर है चलो but काम की है

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