26/06/2026
# Post No.-2
होली चाइल्ड पब्लिक इण्टर कॉलेज, जडौदा, मुजफ्फरनगर के सभागार में शिक्षकों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला ‘‘शिक्षण में नवाचार एवं मनोविज्ञान से संवर्धन’’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गयी। कार्यशाला के प्रथम दिवस का शुभारम्भ मुख्य अतिथि डॉ0 प्रेरणा मित्तल, प्रधानाचार्या, श्रीराम कॉलेज, मु0नगर, टेªनर श्रीमती रितु कश्यप, डॉ0 अनिल कश्यप योगी, श्री अंकित चौधरी, श्री पंकज धीमान, श्री विकास भार्गव, श्रीमती रीटा दहिया और प्रधानाचार्य श्री प्रवेन्द्र दहिया द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया।
डॉ0 प्रेरणा मित्तल ने बताया कि शिक्षा में नवाचार वो तकनीक है जिससे शिक्षक अपनी बात को नये आयामों के माध्यम से बच्चों को समझाते है, नवाचार वह है, जो किसी भी माध्यम से नये विचारों के साथ नये साधनों का प्रयोग करते है। गुरूकुल प्रणाली केवल गुरू पर निर्भर करती थी लेकिन समय बदलने के साथ आज ये तकनीक बदल चुकी है।
बच्चे की समझने की शक्ति अलग-अलग होती है, जब भी हम किसी भी विषय की शुरूआत करते है तो हम बेसिक से शुरू करते है। आप बच्चों के लिए अलग-अलग शैक्षणिक साधनों का प्रयोग किया जाता है।
श्रीमती रीतु कश्यप ने बताया कि डॉ0 मारिया मॉन्टेसरी के अनुसार मॉन्टेसरी शिक्षा बालकेन्द्रित शिक्षण पद्धति है जिससे बच्चों को उसकी रूचि, क्षमता और विकास की गति के अनुसार स्वतंत्र वातावरण में स्वयं अनुभव करके सीखने का अवसर दिया जाता है। शिक्षक का कार्य केवल मार्गदर्शन करना होता है। हमें बच्चों की स्वभाविक सीखने की प्रक्रिया को समझना होगा। एक श्रेष्ठ शिक्षक को विद्यार्थियों का मार्गदर्शक, संवेदनशील, रचनात्मक एवं धैर्यवान होना चाहिए।
बच्चें अपनी कक्षा में शिक्षकों के साथ खुशी की अनुभूति करें न कि किसी डर या भय के साथ वे कक्षा में बैठे रहें। शिक्षकों को कक्षा का खुशनुमा माहौल बनाना चाहिए, क्योंकि खुशनुमा माहौल में ही बच्चे सीखते है और शिक्षक से कनेक्ट होते है। बच्चों को छोटे-छोटे सूक्ष्म कार्य जैसे- शर्ट के बटन बंद करना या खोलना, जूतों की फीते बांधना आदि सिखाने चाहिए।
शिक्षक को अक्षरों एवं इंग्लिश लैटर के उच्चारण सही बोलना बच्चों को सिखाना चाहिए, जिससे बच्चों के शब्दों व वाक्यों के उच्चारण भी सही होगें।
कार्यशाला में डॉ0 अनिल योगी ने बताया कि प्रत्येक विद्यार्थी के सीखने, रूचि, व्यक्तित्व और भावात्मक आवश्यकताएं अलग-अलग होती है। एक प्रभावी शिक्षक वही है जो विद्यार्थियों के मनोविज्ञान को समझते हुए उनकी जिज्ञासा, आत्मविश्वास और रचनात्मकता को विकसित करें।
शिक्षकों को गतिविधि-आधारित शिक्षण, सकारात्मक अनुशासन, प्रभावी संप्रेेषण, प्रेरणा, भावात्मक संतुलन तथा कक्षा प्रबन्धक की आधुनिक तकनीकों से युक्त होना होगा।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों को भी तनावमुक्त एवं प्रसन्नतायुक्त होकर कक्षा में जाना चाहिए, क्योंकि यदि शिक्षक प्रसन्नचित रहेगा तो कक्षा का माहौल भी प्रसन्नचित होगा और ऐसे माहौल में विद्यार्थी सरलता से सीखते है।
अंत में प्रथम दिन के समापन पर प्रधानाचार्य श्री प्रवेन्द्र दहिया ने सभी अतिथियों एवं टेªनर का आभार व्यक्त किया और कहा एक शिक्षक केवल ज्ञान का संचार नहीं करता बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण भी करता है, नवाचार एवं मनोविज्ञान का ज्ञान शिक्षक को प्रत्येक बच्चें की क्षमता पहचाने और उसे सही दिशा देने में सक्षम बनाता है।
26/06/2026
# Post No.-1
होली चाइल्ड पब्लिक इण्टर कॉलेज, जडौदा, मुजफ्फरनगर के सभागार में शिक्षकों के लिए दो दिवसीय कार्यशाला ‘‘शिक्षण में नवाचार एवं मनोविज्ञान से संवर्धन’’ विषय पर कार्यशाला आयोजित की गयी। कार्यशाला के प्रथम दिवस का शुभारम्भ मुख्य अतिथि डॉ0 प्रेरणा मित्तल, प्रधानाचार्या, श्रीराम कॉलेज, मु0नगर, टेªनर श्रीमती रितु कश्यप, डॉ0 अनिल कश्यप योगी, श्री अंकित चौधरी, श्री पंकज धीमान, श्री विकास भार्गव, श्रीमती रीटा दहिया और प्रधानाचार्य श्री प्रवेन्द्र दहिया द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया।
डॉ0 प्रेरणा मित्तल ने बताया कि शिक्षा में नवाचार वो तकनीक है जिससे शिक्षक अपनी बात को नये आयामों के माध्यम से बच्चों को समझाते है, नवाचार वह है, जो किसी भी माध्यम से नये विचारों के साथ नये साधनों का प्रयोग करते है। गुरूकुल प्रणाली केवल गुरू पर निर्भर करती थी लेकिन समय बदलने के साथ आज ये तकनीक बदल चुकी है।
बच्चे की समझने की शक्ति अलग-अलग होती है, जब भी हम किसी भी विषय की शुरूआत करते है तो हम बेसिक से शुरू करते है। आप बच्चों के लिए अलग-अलग शैक्षणिक साधनों का प्रयोग किया जाता है।
श्रीमती रीतु कश्यप ने बताया कि डॉ0 मारिया मॉन्टेसरी के अनुसार मॉन्टेसरी शिक्षा बालकेन्द्रित शिक्षण पद्धति है जिससे बच्चों को उसकी रूचि, क्षमता और विकास की गति के अनुसार स्वतंत्र वातावरण में स्वयं अनुभव करके सीखने का अवसर दिया जाता है। शिक्षक का कार्य केवल मार्गदर्शन करना होता है। हमें बच्चों की स्वभाविक सीखने की प्रक्रिया को समझना होगा। एक श्रेष्ठ शिक्षक को विद्यार्थियों का मार्गदर्शक, संवेदनशील, रचनात्मक एवं धैर्यवान होना चाहिए।
बच्चें अपनी कक्षा में शिक्षकों के साथ खुशी की अनुभूति करें न कि किसी डर या भय के साथ वे कक्षा में बैठे रहें। शिक्षकों को कक्षा का खुशनुमा माहौल बनाना चाहिए, क्योंकि खुशनुमा माहौल में ही बच्चे सीखते है और शिक्षक से कनेक्ट होते है। बच्चों को छोटे-छोटे सूक्ष्म कार्य जैसे- शर्ट के बटन बंद करना या खोलना, जूतों की फीते बांधना आदि सिखाने चाहिए।
शिक्षक को अक्षरों एवं इंग्लिश लैटर के उच्चारण सही बोलना बच्चों को सिखाना चाहिए, जिससे बच्चों के शब्दों व वाक्यों के उच्चारण भी सही होगें।
कार्यशाला में डॉ0 अनिल योगी ने बताया कि प्रत्येक विद्यार्थी के सीखने, रूचि, व्यक्तित्व और भावात्मक आवश्यकताएं अलग-अलग होती है। एक प्रभावी शिक्षक वही है जो विद्यार्थियों के मनोविज्ञान को समझते हुए उनकी जिज्ञासा, आत्मविश्वास और रचनात्मकता को विकसित करें।
शिक्षकों को गतिविधि-आधारित शिक्षण, सकारात्मक अनुशासन, प्रभावी संप्रेेषण, प्रेरणा, भावात्मक संतुलन तथा कक्षा प्रबन्धक की आधुनिक तकनीकों से युक्त होना होगा।
उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों को भी तनावमुक्त एवं प्रसन्नतायुक्त होकर कक्षा में जाना चाहिए, क्योंकि यदि शिक्षक प्रसन्नचित रहेगा तो कक्षा का माहौल भी प्रसन्नचित होगा और ऐसे माहौल में विद्यार्थी सरलता से सीखते है।
अंत में प्रथम दिन के समापन पर प्रधानाचार्य श्री प्रवेन्द्र दहिया ने सभी अतिथियों एवं टेªनर का आभार व्यक्त किया और कहा एक शिक्षक केवल ज्ञान का संचार नहीं करता बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण भी करता है, नवाचार एवं मनोविज्ञान का ज्ञान शिक्षक को प्रत्येक बच्चें की क्षमता पहचाने और उसे सही दिशा देने में सक्षम बनाता है।
23/06/2026
होली चाइल्ड पब्लिक इण्टर कॉलेज, जडौदा, मुजफ्फरनगर के सभागार में संस्था आर्ट ऑफ लीविंग के तत्वाधान में शिक्षकों के लिए प्रेरणादायक कार्यशाला ‘‘आर्ट ऑफ टीचिंग बाय आर्ट ऑफ लिविंग’’ का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ आर्ट ऑफ लिविंग के टीचर श्री धीरज बत्रा, श्रीमती पूनम शर्मा, प्रधानाचार्य श्री प्रवेन्द्र दहिया, श्रीमती रीटा दहिया, श्री धीरज बालियान, श्रीमती सुरेखा, श्रीमती रजनी शर्मा, श्रीमती रीना चौहान, श्री जितेन्द्र कुमार द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य शिक्षकों के व्यक्तित्व विकास, मानसिक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाना था। श्री धीरज बत्रा एवं पूनम शर्मा ने सभी शिक्षकों को सर्वप्रथम सूक्ष्म योग एवं ध्यान की प्रक्रिया सिखाई। धीरज बत्रा ने बताया कि शिक्षक केवल पाठ्य ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र का निर्माता है, शिक्षक अपने ज्ञान, संस्कार और आचरण से विद्यार्थियों के जीवन को सही दिशा प्रदान करता है तथा उनमें नैतिक मूल्यों का विकास करता है। शिक्षकों को नियमित ध्यान (मेडिटेशन) करना चाहिए, जिससे उनका मानसिक तनाव कम होता है, एकाग्रता बढती है, सकारात्मक सोच विकसित होती है तथा उनकी कार्य क्षमता में वृद्धि होती है। शिक्षकों के लिए ध्यान विशेष रूप से उपयोगी है क्योंकि इससे वे शान्त, संतुलित एवं ऊर्जावान बने रहते हैं और विद्यार्थियों को बेहतर मार्गदर्शन दे पाते है।
श्रीमती पूनम शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि एक आदर्श शिक्षक ज्ञानवान, अनुशासित, धैर्यवान, ईमानदार, चरित्रवान, निष्पक्ष, प्रेरणादायक व्यक्तित्व, संवेदनशील एवं सहृदय तथा सकारात्मक सोच वाला होता है। शिक्षक का सबसे बडा गुण यह है कि वे केवल पढाता नहीं बल्कि विद्यार्थियों के जीवन को दिशा है और उनके व्यक्तित्व का निर्माण करता है और उन्हें एक जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करता है।
अंत में श्री प्रधानाचार्य प्रवेन्द्र दहिया एवं समस्त शिक्षकों ने अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए नियमित योग एवं ध्यान करने का संकल्प लिया।
20/06/2026
🏫✨ Holy Child Public School wishes everyone a Happy International Yoga Day! 🧘♀️🌿
Yoga is not just an exercise—it is a way of life that nurtures discipline, enhances concentration, and brings harmony to the mind, body, and soul. On this International Yoga Day, let us inspire our young learners to embrace the power of yoga and build a healthier, happier, and more balanced future. 💚✨
Breathe deeply. Stay active. Live mindfully. 🌍🕊️
20/06/2026
🏫 Holy Child Public School
🌿 Yoga nurtures discipline, concentration, and inner peace. On this International Yoga Day, Holy Child Public School inspires students to adopt yoga for a healthier and happier future. 🧘✨
20/06/2026
Happy Father’s Day! 💙
Behind every confident child stands a loving and supportive father. Holy Child Public School salutes the dedication, sacrifices, and unconditional love of all fathers.
19/06/2026
🧘♂️ ध्यान शिविर – शांति, एकाग्रता और आत्मबल की ओर एक कदम 🌿
Holy Child Public School में आयोजित विशेष ध्यान शिविर में विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं उपस्थित सदस्यों ने ध्यान और प्राणायाम के माध्यम से मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मबल का अनुभव किया। परम पूज्य गुरुजी के मार्गदर्शन में सभी ने स्वस्थ मन और संतुलित जीवन का संदेश प्राप्त किया।
✨ जब मन शांत होता है, तब जीवन की हर चुनौती सरल हो जाती है।
16/06/2026
🎉🧠 QUIZ TIME! 🧠🎉
How well do you know India's rich cultural heritage? 🇮🇳✨
❓ Which Indian classical dance form originated in Kerala?
A️⃣ Kathak
B️⃣ Bharatanatyam
C️⃣ Kathakali
D️⃣ Odissi
💬 Drop your answer in the comments and challenge your friends to test their knowledge too!
At Holy Child Public Inter College, we encourage learning beyond textbooks by exploring India's traditions, culture, and heritage. 🌿📚
🏫 Learn • Explore • Grow