05/03/2026
अंधेरे कमरे में जब हम टॉर्च जलाते हैं, तो हवा में उड़ती धूल से रोशनी का रास्ता साफ दिखता है। विज्ञान का सीधा नियम है—प्रकाश खुद अदृश्य होता है। हम इसे तभी देख पाते हैं जब यह किसी कण या सतह से टकराकर हमारी आँखों तक पहुँचता है।
अंतरिक्ष लगभग पूरी तरह एक निर्वात (Vacuum) है। सूरज से पृथ्वी के बीच करोड़ों किलोमीटर के खालीपन में हवा या धूल के कण नहीं हैं। प्रकाश को बिखेरने के लिए वहां कोई माध्यम ही नहीं होता। इसलिए सूरज की किरणें उस अंधेरे से सीधे गुजर जाती हैं। पृथ्वी पर वायुमंडल इस रोशनी को बिखेरता है, जिससे दिन में उजाला होता है।
हमारी आँखें सिर्फ वही देखती हैं जो उनसे टकराता है। इसलिए खालीपन देखकर यह न मानें कि वहां कुछ नहीं है। हर घटना को विज्ञान की कसौटी पर परखने की आदत डालें।
सोर्स: NASA
#ब्रह्मांडज्ञान
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