#स्वास्थ्य धन एक सामान्य कहावत है जो धन के साथ स्वास्थ्य के मूल्य की तुलना करके बहुत ही सरल अर्थ प्रकट करती है। इस कहावत में कहा गया है कि एक स्वस्थ, शांतिपूर्ण और समृद्ध जीवन जीने के लिए आदमी का स्वास्थ्य उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि धन। हर कोई जानता है कि अच्छे स्वास्थ्य की तुलना में जीवन में कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है। अच्छी सेहत के बिना कोई भी खुश और शांत नहीं रह सकता। यदि वे खराब स्वास्थ्य से पीड़ित हैं तो लोगों के जीवन में कोई सफलता नहीं है। अस्वास्थ्यकर लोग विभिन्न बीमारियों को उठाते हैं ताकि वे एक अमीर व्यक्ति होने का वास्तविक आनंद न उठा सकें।
वास्तव में, स्वास्थ्य किसी व्यक्ति के लिए धन की तुलना में अधिक मूल्यवान होता है क्योंकि धन अच्छा स्वास्थ्य और खुशी नहीं खरीद सकता है, यदि कोई व्यक्ति असाध्य बीमारी से पीड़ित है, तो धन का उपयोग करके अपना स्वास्थ्य बनाए रख सकता है। धन केवल आनंद की स्थिति में रहने का एक स्रोत है। ध्वनि स्वास्थ्य वाले लोग शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, बौद्धिक और आर्थिक रूप से सभी पहलुओं में अपने जीवन का आनंद लेते हैं। स्वास्थ्य को बनाए रखना इतना सरल नहीं है लेकिन इतना आसान भी नहीं है। अच्छा या बुरा स्वास्थ्य आनुवांशिक स्थिति, स्वस्थ भोजन, पर्यावरण, जीवन शैली, नींद की आदतों, सामाजिक स्थिति, मनोवैज्ञानिक स्थिति, वित्तीय स्थिति, पारिवारिक स्थिति, हवा, पानी और कई अन्य चीजों सहित कई कारकों पर निर्भर करता है।
Health is wealth
Health is Wealth
💪💪Good Health for a Long Life.❤️❤️
# #मोबाइल का ज्यादा इस्तेमाल, Mental Health पर नहीं डालता बुरा # #
स्मार्टफोन और मोबाइल के इस्तेमाल से होने वाले साइड इफेक्ट्स पर आए दिन कोई न कोई खबर पढ़ने को मिल जाती है। हाल ही में हुई एक स्टडी की मानें तो मोबाइल का इस्तेमाल मेंटल हेल्थ पर खराब असर नहीं डालता।
स्मार्टफोन के इस्तेमाल से होने वाले साइड इफेक्ट्स पर कई शोध सामने आते रहते हैं। खासतौर पर बच्चों और टीनेजर्स पर इसके असर को लेकर हमेशा डिसकशन चलता रहता है। लेकिन अब एक लेटेस्ट स्टडी के मुतातबिक टीनेजर्स का ऑनलाइन और स्मार्टफोन पर समय बिताना उतना भी बुरा नहीं जितना माना जाता है।
यूनवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना के असिस्टेंट प्रफेसर बताते हैं कि जैसा कि माना जाता है कि स्मार्टफोन युवाओं की मेंटल हेल्थ पर खराब असर डालता है लेकिन वह इससे सहमत नहीं हैं।
जर्नल क्लीनिकल साइकॉलजिकल साइंस में छपी स्टडी के मुताबिक शोधकर्ताओं ने 2000 से ज्यादा टीनेएजर्स पर सर्वे किया। इनकी उम्रे 10 से 15 के बीच में थी। शोधकर्ताओं ने दिन में तीन बार इन युवाओं की मेंटल हेल्थ रिपोर्ट ली साथ ही हर रात टेक्नॉलजी के यूज की रिपोर्ट भी ली।
उन्होंने जानने की कोशिश की कि क्या डिजिटल टेक्नॉलजी के इस्तेमाल से बच्चों में मेंटल हेल्थ से जुड़े कुछ लक्षण दिखाई देते हैं लेकिन उन्होंने पाया कि बढ़ते टेक्नॉलजी के इस्तेमाल से उनकी मेंटल हेल्थ पर कोई खराब असर नहीं दिखा।
शोधकर्ताओं ने बताया कि जो टीनेजर्स ज्यादा मेसेज भेजते थे वे कम मेसेज भेजने वालों से कम डिप्रेस्ड पाए गए। शोधकर्ताओं ने कहा कि टेक्नॉलजी का इस्तेमाल बिल्कुल न करने से अच्छा है इसको सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए।
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