Sanatan Dharam

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30/05/2026

सास ने बहू को बाज़ार भेजा l

06/04/2026

When God in living like a common man

06/03/2026

मृत्युदंड पाने के बाद भी हनुमान को राम जी मार न सके
नारद जी ने ऋषिगण की आवभगत करने का कार्यभार हनुमान जी को सौंपा, लेकिन इन सब में से राम के गुरु विश्वामित्र का सत्कार न करने को कहा, हनुमान जी इस रहस्य को समझ नहीं पाए, लेकिन उन्होंने नारदजी की आज्ञा का पूर्णतः पालन किया।

जिस के फल स्वरूप विश्वामित्र क्रोधित हुए और राम को हनुमान को मृत्यु दंड देने को कहा, गुरु की आज्ञा से विवश राम अपने प्रिय हनुमान पर प्रहार करना शुरू करते हैं, लेकिन नारद जी ने कहा था कि, हनुमान आप चिंतामुक्त हो कर राम नाम का जाप करें कुछ नहीं होगा, हनुमान जी ने इस आज्ञा का भी पालन किया, तब राम के ब्रह्मास्त्र समेत सारे अस्त्र विफल हो गए। यह सब देख कर गुरु विश्वामित्र ने राम से इस घटना का विस्तारण जाना, और अंत में हनुमान जी पर से उनका क्रोध समाप्त हो गया। और उन्होंने अपना आदेश वापिस ले लिया।

03/03/2026

भगवान राम और हनुमान जी की होली अटूट भक्ति और प्रेम का प्रतीक है, जहाँ हनुमान जी अपने प्रभु को अबीर-गुलाल लगाकर हर्षोल्लास मनाते हैं। यह दृश्य बुराई पर अच्छाई की जीत और वसंत ऋतु के आगमन के बीच, लाल और केसरिया रंगों (जो हनुमान जी के प्रिय रंग हैं) के साथ मनाया जाता है।

03/03/2026

राम की सौगंध खाकर राम से ही लड़ने चले हनुमान, जानें रोचक कहानी
मर्यादा पुरुषोत्‍तम भगवान श्रीराम के परम भक्‍त श्री हनुमानजी के बारे में तो सभी जानते हैं। यह भी जानते हैं कि दशरथनंदन राम हनुमान के हृदय में बसते हैं। लेकिन क्‍या आपको यह पता है कि एक बार पवनसुत हनुमान श्रीराम जी से ही लड़ने पहुंच गए थे। हो सकता है यह पढ़कर आपको हैरानी हो। लेकिन यह सत्‍य है और इस घटना का जिक्र श्रीराम कथा में भी सुनने और पढ़ने को मिलता है। लेकिन इससे भी ज्‍यादा हैरान करने वाली बात यह है कि पवनसुत जब श्रीराम से लड़ने के लिए तैयार हुए तो उन्‍होंने सौगंध भी मर्यादा पुरुषोत्‍तम की ही ली। आइए जानते हैं कि ऐसा क्‍या हुआ था कि श्रीराम के परम भक्‍त पवनसुत को उनसे युद्ध करना पड़ा?

03/03/2026

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जिस तरह भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए बुराई (होलिका) जल गई, उसी प्रकार हनुमान जी ने लंका में रावण की सोने की लंका को जलाकर बुराई को नष्ट किया थl

02/03/2026

रावण के साथ अंतिम युद्ध के दौरान, भगवान राम रावण के रथ में होने के दौरान जमीन पर खड़े होकर युद्ध करने वाले थे। श्री हनुमान ने श्री राम को अपने कंधों पर उठा लिया और अपनी ऊंचाई को इस प्रकार समायोजित किया कि श्री राम रावण के बराबर हो जाएं। #

02/03/2026

हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र प्रह्लाद, जो भगवान विष्णु का परम भक्त था, की हत्या करने के लिए अपनी बहन होलिका की सहायता ली । प्रह्लाद को जलाने के प्रयास में, होलिका ने आग से बचाव के लिए एक आवरण ओढ़कर उसके साथ चिता पर बैठ गई। लेकिन आवरण ने प्रह्लाद की रक्षा की और होलिका जल गई।

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