03/10/2022
मैं आपका चेहरा याद रखना चाहता हूं ताकि जब मैं आपसे स्वर्ग में मिलूं,
तो मैं आपको पहचान सकूं और एक बार फिर आपका धन्यवाद कर सकूं।
जब एक टेलीफोन साक्षात्कार में भारतीय
अरबपति रतनजी टाटा से रेडियो प्रस्तोता ने पूछा:
"सर आपको क्या याद है कि आपको जीवन में सबसे अधिक खुशी कब मिली"?
रतनजी टाटा ने कहा:
"मैं जीवन में खुशी के चार चरणों से गुजरा हूं, और आखिरकार मुझे सच्चे सुख का अर्थ समझ में आया।"
पहला चरण धन और साधन संचय करना था।
लेकिन इस स्तर पर मुझे वह सुख नहीं मिला जो मैं चाहता था।
फिर क़ीमती सामान और वस्तुओं को इकट्ठा करने का दूसरा चरण आया।
लेकिन मैंने महसूस किया कि इस चीज का असर भी अस्थायी होता है और कीमती चीजों की चमक ज्यादा देर तक नहीं रहती।
फिर आया बड़ा प्रोजेक्ट मिलने का तीसरा चरण। वह तब था जब भारत और अफ्रीका में डीजल की आपूर्ति का 95% मेरे पास था। मैं भारत और एशिया में सबसे बड़ा इस्पात कारखाने मालिक भी था। लेकिन यहां भी मुझे वो खुशी नहीं मिली जिसकी मैंने कल्पना की थी.
चौथा चरण वह समय था जब मेरे एक मित्र ने मुझे कुछ विकलांग बच्चों के लिए व्हील चेयर खरीदने के लिए कहा। लगभग 200 बच्चे थे। दोस्त के कहने पर मैंने तुरन्त व्हील चेयर खरीद लीं।
लेकिन दोस्त ने जिद की कि मैं उसके साथ जाऊं और बच्चों को व्हील चेयर भेंट करूँ। मैं तैयार होकर उनके साथ चल दिया।
वहाँ मैंने सारे पात्र बच्चों को अपने हाथों से व्हील चेयर दीं। मैंने इन बच्चों के चेहरों पर खुशी की अजीब सी चमक देखी। मैंने उन सभी को व्हील चेयर पर बैठे, घूमते और मस्ती करते देखा।
यह ऐसा था जैसे वे किसी पिकनिक स्पॉट पर पहुंच गए हों, जहां वे बड़ा उपहार जीतकर शेयर कर रहे हों।
मुझे उस दिन अपने अन्दर असली खुशी महसूस हुई। जब मैं वहाँ से वापस जाने को हुआ तो उन बच्चों में से एक ने मेरी टांग पकड़ ली।
मैंने धीरे से अपने पैर को छुड़ाने की कोशिश की, लेकिन बच्चे ने मुझे नहीं छोड़ा और उसने मेरे चेहरे को देखा और मेरे पैरों को और कसकर पकड़ लिया।
मैं झुक गया और बच्चे से पूछा: क्या तुम्हें कुछ और चाहिए?
तब उस बच्चे ने मुझे जो जवाब दिया, उसने न केवल मुझे झकझोर दिया बल्कि जीवन के प्रति मेरे दृष्टिकोण को भी पूरी तरह से बदल दिया।
उस बच्चे ने कहा था-
"मैं आपका चेहरा याद रखना चाहता हूं ताकि जब मैं आपसे स्वर्ग में मिलूं,
तो मैं आपको पहचान सकूं और एक बार फिर आपका धन्यवाद कर सकूं।"
उपरोक्त शानदार कहानी का मर्म यह है कि हम सभी को अपने अंतर्मन में झांकना चाहिए और यह मनन अवश्य करना चाहिए कि, इस जीवन और संसार और सारी सांसारिक गतिविधियों
को छोड़ने के बाद आपको किसलिए याद किया जाएगा?
क्या कोई आपका चेहरा फिर से देखना चाहेगा, यह बहुत मायने रखता है ?
रतन टाटा 25 वर्ष रतन टाटा 84 वर्ष
30/01/2022
संगति असर --
शिक्षाप्रद कहानी-------
एक राजा का तोता मर गया। उन्होंने कहा-- मंत्रीप्रवर! हमारा पिंजरा सूना हो गया। इसमें पालने के लिए एक तोता लाओ।
तोते सदैव तो मिलते नहीं। राजा पीछे पड़ गये तो मंत्री एक संत के पास गये और कहा-- भगवन्!
राजा साहब एक तोता लाने की जिद कर रहे हैं। आप अपना तोता दे दें तो बड़ी कृपा होगी। संत ने कहा- ठीक है, ले जाओ।
राजा ने सोने के पिंजरे में बड़े स्नेह से तोते की सुख-सुविधा का प्रबन्ध किया।
तोता ब्रह्ममुहूर्त में बोलने लगा-- जय श्री राम ,,, ओम् तत्सत्....ओम् तत्सत् ... उठो राजा! उठो महारानी!
दुर्लभ मानव-तन मिला है। यह सोने के लिए नहीं, भजन करने के लिए मिला है।
चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीर। तुलसीदास चंदन घिसै तिलक देत रघुबीर।।'
कभी रामायण की चौपाई तो कभी गीता के श्लोक उसके मुँह से निकलते। पूरा राजपरिवार बड़े सबेरे उठकर उसकी बातें सुना करता था। राजा कहते थे कि तोता क्या मिला, एक संत मिल गये।
हर जीव की एक निश्चित आयु होती है। एक दिन वह तोता मर गया। राजा, रानी, राजपरिवार और पूरे राष्ट्र ने हफ़्तों शोक मनाया। झण्डा झुका दिया गया।
किसी प्रकार राजपरिवार ने शोक संवरण किया और राजकाज में लग गये। पुनः राजा साहब ने कहा-- मंत्रीवर ! खाली पिंजरा सूना-सूना लगता है, एक तोते की व्यवस्था करें!
मंत्री ने इधर-उधर देखा, एक कसाई के यहाँ वैसा ही तोता एक पिंजरे में टँगा था। मंत्री ने कहा कि राजा साहब चाहते की ये तोता उन्हें मिले।
कसाई ने कहा कि हम आपके राज्य में ही तो रहते हैं। हम नहीं भी देंगे तब भी आप उठा ही ले जायेंगे।
मंत्री ने कहा-- नहीं नहीं, हमारी विनती है।
कसाई ने बताया कि किसी बहेलिये ने एक वृक्ष से दो तोते पकड़े थे। एक को उसने महात्माजी को दे दिया था और दूसरा मैंने खरीद लिया था। राजा को चाहिये तो आप ले जाएं।
अब कसाईवाला तोता राजा के पिंजरे में पहुँच गया।
राजपरिवार बहुत प्रसन्न हुआ। सबको लगा कि वही तोता जीवित होकर चला आया है।
दोनों की नासिका, पंख, आकार, चितवन सब एक जैसे थे। लेकिन बड़े सवेरे तोता उसी प्रकार राजा को बुलाने लगा जैसे वह कसाई अपने नौकरों को उठाता था कि..
उठ ! हरामी के बच्चे! राजा बन बैठा है। मेरे लिए ला अण्डे, नहीं तो पड़ेंगे डण्डे!
ये ही बात बार बार दोहराने लगा राजा को इतना क्रोध आया कि उसने तोते को पिंजरे से निकाला और गर्दन मरोड़कर किले से बाहर फेंक दिया।
दोनों तोते, सगे भाई थे। एक की गर्दन मरोड़ दी गयी, तो दूसरे के लिए झण्डे झुक गये, भण्डारा किया गया, शोक मनाया गया।
आखिर भूल कहाँ हो गयी ? अन्तर था तो संगति का ! सत्संग की कमी थी।
संगत ही गुण होत है, संगत ही गुण जाय।
बाँस फाँस अरु मीसरी, एकै भाव बिकाय।।
शिक्षा :- अपने बच्चों को उच्चशिक्षा के साथ साथ अच्छे संस्कार भी दीजिए ताकि वो जहां भी जाये सबका समान करे और अपने आचरण से खुद के साथ परिवार का नाम भी रोशन करे ।
सदैव प्रसन्न रहिये।
अच्छा बोलें सही शब्दों का प्रयोग करें🙏
07/01/2022
Once in a physics class, the teacher asked the students,
“Why do we have brakes in a car ?”
Varied answers were received:
“To stop”
“To reduce speed”
“To avoid collision” etc.,
But the best answer was,
“To enable you to drive faster”
Give it a thought.
For a moment assume you have no brakes in your car then how fast will you drive your car ??
It’s because of brakes that we can dare to accelerate, dare to go fast and reach destinations we desire.
At various points in life, we find our parents, teachers, mentors & friends etc. questioning our progress, direction or decision. We consider them as irritants or consider such inquiries as “brakes” to our ongoing work.
But, remember, it’s because of such questions (periodical brakes) that you have managed to reach where you are today. Without brakes, you could have skid, lost direction or met with an unfortunate accident.
Appreciate the “brakes” in your life. Use them wisely !!
😊😊
28/11/2021
सब अपने-अपने बच्चों और परिवार वालों को सेट करने के लगे हैं तो देश को कौन सेट करेगा ?
जिनकी राजनीति का आधार है वंशवाद,
वो कर रहे लोकतांत्रिक व्यवस्था को बर्बाद।
12/11/2021
जाड़ा आ ही गया ! अपने गाँव में जाड़ा के आते आते ही आपको गली - गली में हर चार कदम पर 'अंडा' का दूकान मिल जाएगा :D - चार वर्ष का बच्चा से लेकर सत्तर साल के बुढा तक दुकानदार मिल जाएगा - इसी उम्र का खाने वाला भी ! एक ठेला पर सजा हुआ 'अंडा' - बगल में एक किरोसिन स्टोव पर अलुमिनियम तसला में उबलता हुआ - 'अंडा' ! झप्पू भईया का हीरो हौंडा रुका - बाईक पर बैठल बैठल चार ठो 'उबला हुआ' अंडा का ऑर्डर ! अभी वो 'अंडा' छील ही रहा है - तब तक झ्प्पू भईया बोले - दू ठो 'पोंच' बनाओ :D ! अंडा वाला स्टोव में - दे पम्प - दे पम्प ! झ्प्पू भईया भी एक दम स्टोव की तरह 'हाई कान्फिडेंस' में ! अभी झ्प्पू भईया एक उबला हुआ अंडा खाए ही की उधर से 'चिम्पू' भी टहलता हुआ - दू ठो 'पोंच' उसके लिए भी ऑर्डर हुआ - अब वो झ्प्पू भईया के पैसा से 'पोंच' खा रहा था - मन ही मन खुश - कैसा जतरा है - मुफ्त में दू ठो 'पोंच' मिल गया ! अब उसका धर्म बनता है - झ्प्पू भईया का बड़ाई - अब चिम्पू पोंच का पैसा पैसा ..बड़ाई कर के चुकता करेगा - भईया ..आपका हीरो होंडा गजब ...भईया आपका चप्पल गजब ...भईया ..आपका घड़ी गजब ! झ्प्पू भईया भी समझ गए ...चलते चलते ...एक - एक और 'पोंच' का ऑर्डर हुआ !
पुरे बिहार में 'पोंच' का फैशन है - जिसको बाकी के भारत में 'हाफ फ्राई' कहते हैं ! 'पोंच' को एक मध्यम आकार के 'कलछुल' में घी या करुआ तेल में बनाया जाता है ! कई भाई बंधू जो एक बार में छः 'पोंच' खड़े खड़े डकार लें - उन्हें उनके मित्र मंडली में 'पोंचवा' की उपाधी दी जाती है :D
10/11/2021
बचपन में सुना था ............
हरी थी, मन भरी थी,लाख मोती जड़ी थी
राजा जी के बाग में दुशाला ओढ़े खड़ी थी ....
दर्शन करिये दुशाला वाली के..
😂😂😂😂🤣🤣🤣🤣
23/08/2021
कल सैलून वाले क़ी दुकान पर एक स्लोगन पढा़ ..
"हम दिल का बोझ तो नहीं पर सिर का बोझ जरूर हल्का कर सकते हैं "..🤣
लाइट क़ी दुकान वाले ने बोर्ड के नीचे लिखवाया ..
"आपके दिमाग की बत्ती भले ही जले या ना जले,परंतु हमारा बल्ब ज़रूर जलेगा ".. 🤣
चाय के होटल वाले ने काउंटर पर लिखवाया ..
"मैं भले ही साधारण हूँ, पर चाय स्पेशल बनाता हूँ।"🤣
एक रेस्टोरेंट ने सबसे अलग स्लोगन लिखवाया ..
"यहाँ घऱ जैसा खाना नहीं मिलता, आप निश्चिंत होकर अंदर पधारें।" 😀
इलेक्ट्रॉनिक दुकान पर स्लोगन पढ़ा तो मैं भाव विभोर हो गया ..
"अगर आपका कोई फैन नहीं है तो यहाँ से ले जाइए "..😂
गोलगप्पे के ठेले पर एक स्लोगन लिखा था ..
"गोलगप्पे खाने के लिए दिल बड़ा हो ना हो, मुँह बड़ा रखें, पूरा खोलें" ..🤣
फल भंडार वाले ने तो स्लोगन लिखने की हद ही कर दी ..
"आप तो बस कर्म करिए, फल हम दे देंगे ".. 🤣
घड़ी वाले ने एक ग़ज़ब स्लोगन लिखा ..?
"भागते हुए समय को बस में रखें, चाहे दीवार पर टांगें, चाहे हाथ पर बांधें..."..🤣
ज्योतिषी ने बोर्ड पर स्लोगन लिखवाया۔
"आइए .. मात्र 100 रुपए में अपनी ज़िंदगी के आने वाले एपिसोड देखिए ..."🤣
बालों के तेल क़ी एक कंपनी ने हर प्रोडक्ट पर एक स्लोगन लिखा ..
"भगवान ही नहीं, हम भी बाल बाल बचाते हैं।" ..😂😀🤣
आप जैसे अभी हल्का सा मुस्करा रहे हैं या हँस रहें हैं, ऐसे ही खुश रहें।।
हँसते रहे हँसाते रहें
स्वस्थ रहें मस्त रहे
😁😁
01/08/2021
सभी को मित्रता दिवस की हार्दिक बधाई....
24/07/2021
कमर में पिस्टल, कांधे पर जनेऊ, शेर सी शख्सियत..
वो याद थे, वो याद हैं, वो याद रहेंगे..
आज़ाद थे...आज़ाद है...आज़ाद रहेंगे...🙏🙏🙏🙏🙏🙏
23/12/2020
।। महत्व ।।
पिता के दुलार का , माता के संस्कार का ।
बुजुर्गों के विचार का , बड़ा महत्व होता है ।।
माता के आशीष का , पिता के बक्शीश का ।
शरणागत शीश का , बड़ा महत्व होता है ।।
जन्म में जान का , ज़िन्दगी में जहान का ।
मृत्यु में श्मशान का , बड़ा महत्व होता है ।।
गीत में गान का , संगीत में तान का ।
सुर में बँधान का , बड़ा महत्व होता है ।।
वाणी में मिठास का , जिन्दगी में साँस का ।
काव्य में समास का , बड़ा महत्व होता है ।।
व्यंजन में लवन का , सृष्टि में सृजन का ।
प्रीति में सजन का , बड़ा महत्व होता है ।।
वन्दन में प्रणाम का , अभिनन्दन में नाम का ।
चिन्तन में राम का , बड़ा महत्व होता है ।।
खेल में कप्तान का , खेत में किसान का ।
रण में जवान का , बड़ा महत्व होता है ।।
मंच पे सम्मान का , हृदय में अपमान का ।
मर्द की जुबान का , बड़ा महत्व होता है ।।
शादी में बारात का , सुहाग वाली रात का ।
प्रेम भरी सौगात का , बड़ा महत्व होता है ।।
सूर्य के प्रकाश का , चन्द्र के प्रभास का ।
सितारों से एहसास का , बड़ा महत्व होता है ।।
अध्ययन में अभ्यास का,अनुभव में आभास का ।
अन्तस में विश्वास का , बड़ा महत्व होता है ।।
बचपन की नादानी का, जवानी की रवानी का ।
बुढ़ापे में कमानी का , बड़ा महत्व होता है ।।
युद्ध में आघात का , विरुद्ध में प्रतिघात का ।
क्रुद्ध में जज़्बात का , बड़ा महत्व होता है ।।
नारी में सतित्व का , आदमी में अस्तित्व का ।
स्वयं के व्यक्तित्व का , बड़ा महत्व होता है ।।
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