12/06/2026
गाजीपुर कोर्ट में एक सनसनीखेज मामले की सुनवाई के दौरान ऐसा वाकया सामने आया जिसने हर किसी को झकझोर कर रख दिया।
जब जज ने आरोपी से सवाल किया कि “अगर तुम्हें छोड़ दिया जाए तो क्या करोगे?” — इस पर आरोपी ने बेखौफ जवाब दिया, “फिर से हत्या करूंगा।”
यह सुनते ही अदालत का माहौल सन्न हो गया। आरोपी के इस खतरनाक और निर्भीक रवैये को देखते हुए कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और उसे फांसी की सजा सुनाते हुए कहा — “इसे मरते दम तक लटकाया जाए।”
⚖️ यह फैसला न सिर्फ एक अपराधी को सजा देने का है, बल्कि समाज में कानून का डर और न्याय की ताकत को भी दर्शाता है।
ऐसे अपराधियों के लिए सख्त सजा ही समाज को सुरक्षित बना सकती है।
27/05/2026
हुक्का बार चलाने का कोई मौलिक अधिकार नहीं, यह गतिविधि 'रेस एक्स्ट्रा कमर्शियम' के दायरे में आती है: इलाहाबाद हाईकोर्ट
इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने हाल ही में यह टिप्पणी की कि नागरिकों के पास हुक्का बार चलाने का कोई मौलिक अधिकार नहीं है, क्योंकि ऐसी गतिविधियां 'रेस एक्स्ट्रा कमर्शियम' (वाणिज्य से बाहर/परे की चीज़ें) के कानूनी सिद्धांत के अंतर्गत आती हैं। यह टिप्पणी जस्टिस आलोक माथुर और जस्टिस अमिताभ कुमार राय की डिवीज़न बेंच ने एम्पेरियो ग्रैंड प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर रिट याचिका की सुनवाई के दौरान की। यह कंपनी लखनऊ में होटल और रेस्टोरेंट का कारोबार करती है।
15/05/2026
पुलिस शिकायत वाले मामलों में आरोपी को तब तक गिरफ्तार नहीं कर सकती, जब तक समन के साथ-साथ गैर-जमानती वारंट जारी न हो जाए: सुप्रीम कोर्ट
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की खंडपीठ ने टिप्पणी की, "एक बार जब कोर्ट संज्ञान ले लेता है और समन जारी कर देता है तो आरोपी को बस इतना करना होता है कि वह उस कोर्ट के सामने पेश हो और कार्यवाही में शामिल हो। आरोपी को सेशंस कोर्ट या हाईकोर्ट (जैसा भी मामला हो) में जाकर अग्रिम ज़मानत की गुहार क्यों लगानी चाहिए? शिकायत वाले मामले में आरोपी को गिरफ्तार करने की पुलिस के पास कोई शक्ति नहीं होती, जब तक कि उस कोर्ट द्वारा समन के साथ-साथ गैर-जमानती वारंट जारी न किया गया हो।"